मंत्रिमंडल विस्तार में कहां हुई चूक, पूर्व मंत्री बोले-‘असंवैधानिक गलतियां हुई, स्वीकार करें’

मंत्रिमंडल विस्तार में कहां हुई चूक, पूर्व मंत्री बोले-‘असंवैधानिक गलतियां हुई, स्वीकार करें’

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में लम्बे मंथन के बाद आखिरकार शिवराज सरकार (Shivraj Government) का पहला मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) संपन्न हो गया| शिवराज की टीम में 28 नए सदस्यों ने मंत्रिपद की शपथ ली| 20 ने कैबिनेट और 8 ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली। अब पिछले पांच मंत्रियों को मिलाकर मंत्रिमंडल में कुल 33 मंत्री हो गए हैं। अंतिम समय तक नामों को लेकर माथापच्ची चलती रही| इस बीच मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा से बड़ी चूक हो गई| कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा (Sajjan Singh Verma) ने सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) और राज्यपाल पर 2 बड़ी संवैधानिक गलती करने का आरोप लगाया है|

पहली गलती प्रोटेम स्पीकर को मंत्री पद की शपथ दिला दी और दूसरी गलती संविधान में अनुमत संख्या से ज़्यादा मंत्री बनाये गए| पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा संविधान के नियमानुसार जितने विधायक हैं, उसके हिसाब से 15 प्रतिशत लोगों को ही मंत्री बनाया जा सकता है| लेकिन शिवराज सरकार में पद के लालच में 3 अतिरिक्त लोगों को मंत्री बनाया गया है| उन्होंने शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि आखिर जो व्यक्ति 15 सालों तक मुख्यमंत्री रहा हो, वह कैसे ऐसी संवैधानिक गलती कर सकता है| राज्यपाल इसके गवाह हैं|

प्रोटेम स्पीकर देवड़ा को मंत्री बनाए जाने से पद खाली
इसके अलावा उन्होंने प्रोटेम स्पीकर जगदीश देवड़ा को मंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देवड़ा को बिना इस्तीफा दिलाए मंत्री बना दिया गया जबकि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति शासन लागू होने पर भी प्रोटेम स्पीकर का पद खाली नहीं रहता है| सज्जन वर्मा ने कहा हम चाहते हैं कि शिवराज गलती स्वीकार करें नहीं तो हम न्यायपालिका के दरबाजे खुले हैं|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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