किसने की आईपीएस की छवि धूमिल करने की कोशिश

किसने की आईपीएस की छवि धूमिल करने की कोशिश

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के आईपीएस (IPS) जगत में ईमानदार और निर्भीक छवि के अधिकारी माने जाने वाले वर्तमान परिवहन आयुक्त वी. मधु कुमार (V.Madhu kumar) का एक तथाकथित ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आरोप लगाया जा रहा है कि मधुकुमार अपने अधीनस्थ अधिकारियों से वसूली कर रहे हैं । हैरत की बात यह है कि यह वीडियो वर्षों पुराना है जब मधुकुमार आईजी हुआ करते थे और सूत्रों की माने तो उन्होंने आईजी रहते हुए सभी थाना प्रभारियों को इस बात के निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने क्षेत्र में संगठित अपराधियों, चिटफंडयो, जुआरियों, सटोरियों और अपराधियों की एक गोपनीय सूची उनको दें ताकि उनके ऊपर प्रभावी कार्रवाई की जा सके और उसके साथ-साथ अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके।

इस वीडियो में हर अधिकारी मधु कुमार को एक लिफाफा देते हुए नजर आता है जिस पर वह बाकायदा संबंधित थाने का नाम लिखकर उसे अपने ब्रीफकेस में रख लेते हैं ।इसी को लेकर यह प्रचारित किया जा रहा है कि यह रिश्वत ली जा रही है जबकि ना तो संबंधित अधिकारी जो लिफाफे दे रहे हैं उनसे लेनदेन का किसी प्रकार का कोई जिक्र है और सबसे बड़ी बात यह है कि सामने बैठा हुआ व्यक्ति मधुकुमार से सामान्य बातचीत कर रहा है जो इस बात को साफ दिखाता है कि यदि रिश्वत लेनदेन का मामला होता तो कोई भी अधिकारी किसी व्यक्ति के सामने रिश्वत कैसे ले सकता था। प्रथम दृष्टया देखने पर ही यह वीडियो एक अधिकारी की छवि को खराब करने का षड्यंत्र दिखता है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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