पुलिस पिटाई से युवक की मौत! कार्रवाई की मांग, सरकार को चेतावनी

पुलिस पिटाई से युवक की मौत! कार्रवाई की मांग, सरकार को चेतावनी

भोपाल| प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान घरों से बाहर सड़कों पर निकलने वाले लोगों से पुलिस सख्ती से पेश आ रही है|| अनेकों जगह पुलिस की पिटाई के मामले सामने आये हैं| खरगोन जिले में पुलिस की पिटाई से युवक की मौत के आरोप परिजनों ने लगाए हैं| घटना को लेकर कांग्रेस ने शिवराज सरकार को घेरा है| पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने ट्वीट कर सरकार को निशाने पर लिया है|

पूर्व सीएम ने ट्वीट कर लिखा- “खरगोन ज़िले की महेश्वर तहसील के आदिवासी भाई टीबु मेड़ा की आज सुबह राशन खरीदने निकलने पर पुलिस की पिटाई से मौत काआरोप उनके परिजनो ने लगाया है। यह बेहद दुःखद घटना है। शिवराज सरकार आते ही प्रदेश में आदिवासियों भाइयों पर दमन की घटनाएँ प्रारंभ हो गयी है।ऐसी घटनाएँ क़तई बर्दाश्त नहीं की जायेगी। शिवराज सरकार तत्काल इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच करवाये और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करे”।

अरुण यादव ने दी सड़क पर उतरने की चेतावनी
अरुण यादव ने ट्वीट कर लिखा “महेश्वर तहसील के आदिवासी टीबु मेड़ा की राशन खरीदने निकलने पर पुलिस द्वारा की गई पिटाई से मौत का मामला सामने आया है, यह घटना बहुत दुःखद एवं पीड़ादायक है, सरकार इस मामले मे कड़ी कार्यवाही करे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, हमे जमीन पर उतरने के लिए मजबूर न करे शिवराज सरकार”।

http://twitter.com/MPArunYadav/status/1246489….483698032640

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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