बिहार विधानसभा चुनावों की सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन दोनों ही अपनी-अपनी ताकत झोंक रहे हैं। आज, 30 अक्टूबर को राज्य के कई जिलों में प्रमुख नेताओं की रैलियां आयोजित हो रही हैं, जो पहले चरण के मतदान से ठीक पहले वोटरों को लुभाने का अंतिम प्रयास हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे एनडीए के दिग्गजों के अलावा विपक्षी दलों के नेता राहुल गांधी भी मैदान में उतरेंगे। ये रैलियां मुजफ्फरपुर, छपरा, नालंदा, शेखपुरा, पटना, मुंगेर, बेगूसराय और लखीसराय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में केंद्रित हैं, जहां पार्टियां अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने पर जोर दे रही हैं।
एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में अपनी चुनावी यात्रा को तेज कर रहे हैं। वे आज सुबह 11 बजे मुजफ्फरपुर के बरुराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मोतीपुर में एक रोड शो और विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, उसके बाद दोपहर 12:45 बजे छपरा में दूसरी रैली करेंगे। बिहार भाजपा प्रमुख दिलीप जायसवाल ने बताया कि ये रैलियां एनडीए की विकास और स्थिरता की थीम पर केंद्रित होंगी। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लखीसराय, मुंगेर, नालंदा और पटना में कई सभाओं को संबोधित करेंगे, जहां वे महागठबंधन पर भ्रष्टाचार और जातिवाद के आरोप लगाने के साथ-साथ एनडीए सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करेंगे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी बेगूसराय और नालंदा में रैलियों का आयोजन करेंगे।
राहुल गांधी कहां जा रहे
विपक्षी महागठबंधन की ओर से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बिहार में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। वे आज दोपहर 12:30 बजे नालंदा जिले के नूरसराय में सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, उसके बाद 2:15 बजे शेखपुरा जिले के बरबीघा के करे गांव में दूसरी सभा करेंगे। कांग्रेस के इन आयोजनों को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ संयुक्त अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जहां राहुल गांधी बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर एनडीए सरकार पर हमला बोलेंगे। महागठबंधन ने अपनी संयुक्त घोषणा-पत्र जारी करने के बाद इन रैलियों को वोटरों तक पहुंचने का माध्यम बनाया है।
राजनीतिक माहौल और गरमाया
इन रैलियों से बिहार का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, जहां दोनों गठबंधन 6 और 11 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए अंतिम धक्का दे रहे हैं। एनडीए विकास और कानून-व्यवस्था पर फोकस कर रहा है, जबकि महागठबंधन सामाजिक न्याय और युवा एजेंडे को प्रमुखता दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज की ये सभाएं वोटरों के मन में अंतिम छाप छोड़ेंगी, जो 14 नवंबर को वोट गिनती के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। बिहार की जनता इन आयोजनों पर नजरें गड़ाए हुए है, क्योंकि ये न केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाले भी साबित हो सकते हैं।





