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2025 में RJD को लगेगा बड़ा झटका! ओवैसी ने बना डाला ये ‘सीक्रेट प्लान’, क्या AIMIM अकेले दम पर बदलेगी बिहार की सियासत?

Written by:Vijay Choudhary
Published:
2025 में RJD को लगेगा बड़ा झटका! ओवैसी ने बना डाला ये ‘सीक्रेट प्लान’, क्या AIMIM अकेले दम पर बदलेगी बिहार की सियासत?

बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति गरमाई हुई है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने आरजेडी से गठबंधन का प्रस्ताव भेजा, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार (11 सितंबर, 2025) को एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ राबड़ी आवास तक मार्च किया। हाथों में बैनर और ढोल के साथ कार्यकर्ता पहुंचे। बैनर पर लिखा था कि आरजेडी को अपने दरवाजे खोलकर गठबंधन करना चाहिए, वरना मुस्लिम-यादव समीकरण की पोल खुल जाएगी। इससे चुनावी हलचल बढ़ गई है।

गठबंधन का प्रस्ताव और आरजेडी पर आरोप

अख्तरुल ईमान ने कहा कि आरजेडी हमें बीजेपी की बी टीम बताती है, लेकिन यह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि महागठबंधन में शामिल कुछ दल पहले बीजेपी के साथ रह चुके हैं, फिर भी एआईएमआईएम को साथ नहीं लिया गया। उन्होंने इसे आरजेडी का मुस्लिम विरोधी रवैया बताया। सेक्युलर वोटों के बिखराव को रोकने के लिए गठबंधन जरूरी है। अख्तरुल ईमान ने कहा कि तेजस्वी यादव का कहना है कि उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव नहीं मिला, इसलिए वे चिट्ठी लेकर आए हैं। नहीं तो वे थर्ड फ्रंट बनाकर चुनाव लड़ेंगे और आरजेडी के समीकरण की पोल खोल देंगे।

सेक्युलर राजनीति और चुनावी समीकरण

अख्तरुल ईमान ने कहा कि एआईएमआईएम बिहार में सेक्युलर सरकार चाहती है और इसके लिए एनडीए को हटाना होगा। उन्होंने गठबंधन की मांग दोहराई। बिहार में मुस्लिमों की आबादी करीब 18% है, इसलिए उनका समर्थन चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। 2020 में एआईएमआईएम ने तीसरा मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ा था और आरजेडी के वोट बैंक में सेंधमारी करते हुए पांच सीटें जीती थीं। हालांकि बाद में चार विधायक आरजेडी में चले गए। इस बार भी अगर पार्टी अलग लड़ती है तो महागठबंधन को नुकसान और एनडीए को फायदा हो सकता है।

आगे की रणनीति और संभावित असर

अख्तरुल ईमान ने कहा कि गठबंधन नहीं होने पर वे थर्ड फ्रंट बनाकर चुनाव लड़ेंगे। इससे आरजेडी का मुस्लिम-यादव समीकरण टूट सकता है। उनका दावा है कि वे सेक्युलर वोटों को बिखरने से रोकना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि महागठबंधन में शामिल दलों का रुख भी सवालों के घेरे में है। एआईएमआईएम की रणनीति से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। अगर गठबंधन नहीं हुआ तो एनडीए को इसका लाभ मिल सकता है। ऐसे में बिहार का 2025 का विधानसभा चुनाव नई राजनीतिक दिशा लेने वाला है, जहां मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक साबित हो सकता है।