राज्यसभा चुनाव से पहले BJP ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल चार नाम हैं—विनोद तावड़े, रामदास अठावले, माया चिंतामन इवनाते और रामराव वडकुते। पार्टी की ओर से यह सूची ऐसे समय आई है जब 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों पर मतदान होना है।
एक दिन पहले, 3 मार्च को, पार्टी ने पहली सूची में 6 राज्यों से 9 उम्मीदवार घोषित किए थे। दूसरी सूची के बाद BJP अब 7 राज्यों से 13 उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। यानी उम्मीदवार चयन का पहला चरण पार्टी ने काफी तेज गति से पूरा किया है।
पहली और दूसरी सूची मिलाकर किन-किन नामों का ऐलान
पहली सूची में बिहार से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार के नाम शामिल थे। छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया गया। असम से तेराश गोवाला और जोगेन मोहन के नाम घोषित हुए। हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार, जबकि पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया था।
अब दूसरी सूची में चार और नाम जोड़ने के साथ BJP ने अपने संगठन और सहयोगी समीकरण—दोनों संकेत दिए हैं। खासतौर पर महाराष्ट्र में विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के नाम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में इस बार सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव है।
कब मतदान, कब गिनती और क्यों हो रहे हैं चुनाव
चुनाव आयोग ने 18 फरवरी को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी।
ये सभी सीटें संबंधित सांसदों का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं। राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है। जिन सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है, उन्हीं सीटों पर यह चुनाव कराया जा रहा है। नए निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल शपथ की तारीख से अगले छह साल यानी 2032 तक माना जाएगा।
37 सीटों में से 12 फिलहाल NDA के पास हैं और 25 सीटें विपक्षी दलों के पास मानी जा रही हैं। सीटों के हिसाब से महाराष्ट्र में 7, तमिलनाडु में 6 और बिहार व पश्चिम बंगाल में 5-5 सीटों पर चुनाव होना है। जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल 2 अप्रैल को पूरा हो रहा है, उनमें शरद पवार, रामदास अठावले, कणिमोझी, तिरुचि शिवा और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश शामिल हैं।
मतदान प्रक्रिया: बैलेट पेपर, तय पेन और पर्यवेक्षक
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से उपलब्ध कराया गया तय मानक का वॉयलेट रंग का स्केच पेन ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी अन्य पेन से डाला गया मत मान्य नहीं होगा।
आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने की बात भी कही है। इसी क्रम में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में EVM और VVPAT को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 5 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में 1.20 लाख से ज्यादा लोगों ने डेमो कैंप में हिस्सा लिया और 1.16 लाख से ज्यादा लोगों ने मॉक वोट डाले। 10 फरवरी तक 29 हजार से अधिक पोलिंग स्टेशन लोकेशन मोबाइल डेमो वैन के जरिए कवर किए जा चुके थे।
राज्यसभा चुनाव आम चुनाव से कैसे अलग होता है
राज्यसभा के चुनाव प्रत्यक्ष नहीं, अप्रत्यक्ष होते हैं। जनता सीधे सांसद नहीं चुनती; संबंधित राज्यों के विधायक मतदान करते हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए हर दो साल में इसके एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उतनी सीटों पर चुनाव कराया जाता है।
राज्यसभा की कुल 245 सीटें हैं। इनमें 233 सीटों के लिए चुनाव होता है, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं। किसी उम्मीदवार की जीत के लिए जरूरी मतों का कोटा पहले से गणना के जरिए तय किया जाता है। यह गणना संबंधित विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या और खाली सीटों के आधार पर की जाती है।
महाराष्ट्र का उदाहरण लें तो विधानसभा में 288 विधायक हैं और इस बार 7 सीटें खाली हो रही हैं। फॉर्मूला के हिसाब से 288×100/(7+1) के बाद कोटा 3601 आता है। चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 मानी जाती है, इसलिए यहां एक सीट जीतने के लिए कम से कम 36 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
BJP की दूसरी सूची के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि बाकी दल अपने शेष उम्मीदवार कब घोषित करते हैं और 16 मार्च की वोटिंग से पहले राज्यों में संख्याबल का अंतिम गणित किस रूप में सामने आता है।






