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बिहार में जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत, जून से 1990 तक की पुरानी रजिस्ट्री और डीड के कागजात मिलेंगे ऑनलाइन, जानें पूरी प्रक्रिया

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
बिहार में लाखों जमीन मालिकों को जल्द ही सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जून से 1990 और उससे भी पुराने भूमि दस्तावेजों को ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा शुरू कर रहा है, जिससे भूमि विवाद और अपराध कम होने की उम्मीद है।
बिहार में जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत, जून से 1990 तक की पुरानी रजिस्ट्री और डीड के कागजात मिलेंगे ऑनलाइन, जानें पूरी प्रक्रिया

पटना: बिहार के लाखों जमीन मालिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। अब उन्हें अपनी जमीन के पुराने दस्तावेजों और रजिस्ट्री के कागजातों के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इस साल जून से एक ऐसी व्यवस्था शुरू करने जा रहा है, जिससे लोग 1990 और उससे भी पुराने भूमि रिकॉर्ड सीधे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। इस कदम से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राज्य में अपराध की एक बड़ी वजह माने जाने वाले भूमि विवादों पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।

यह सुविधा उन लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो दशकों से अपने पुराने रिकॉर्ड के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए परेशान थे। नई प्रणाली के लागू होने के बाद ज्यादातर मामलों में इसकी जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।

क्यों जरूरी था यह कदम: 60% अपराध की जड़ है जमीन विवाद

बिहार में भूमि विवाद केवल संपत्ति का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि राज्य में होने वाले लगभग 60% अपराधों के मूल में जमीन से जुड़े विवाद होते हैं। ये विवाद अक्सर हत्याओं, जातीय संघर्षों और पीढ़ियों तक चलने वाली पारिवारिक दुश्मनी का कारण बनते हैं। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार संभालने के बाद भूमि प्रशासन में सुधार को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है।

“फर्जी दस्तावेज अधिकांश भूमि विवादों का मूल कारण हैं, डिजिटाइजेशन और पारदर्शिता ही एकमात्र स्थायी समाधान हैं।”- विजय कुमार सिन्हा, उपमुख्यमंत्री, बिहार

कैसे काम करेगी नई ऑनलाइन प्रणाली?

नई व्यवस्था के तहत, कोई भी भूमि मालिक अपने खाता नंबर, प्लॉट नंबर और जिले जैसे कुछ बुनियादी विवरण दर्ज करके 2006 से पहले के रजिस्ट्री दस्तावेज और पुराने सर्वेक्षण रिकॉर्ड ऑनलाइन प्राप्त कर सकेगा।

विभाग ने 1990 और 2005 के बीच के रिकॉर्ड के लिए चार करोड़ से अधिक पृष्ठों को पहले ही स्कैन कर लिया है, जबकि इससे भी पुराने दस्तावेजों को प्राथमिकता के आधार पर डिजिटाइज किया जा रहा है। पोर्टल के लाइव होने के बाद, किसी भी लंबित शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन किया जा सकेगा और कुछ ही मिनटों में दस्तावेज डिजिटल रूप से उपलब्ध हो जाएंगे।

दाखिल-खारिज के लिए भी तय हुई समय-सीमा

पुराने दस्तावेजों को ऑनलाइन करने के साथ-साथ विभाग ने दाखिल-खारिज (Mutation) के मामलों के निपटारे के लिए भी समय-सीमा सख्त कर दी है। अब अधिकारियों को तय समय के भीतर मामलों का निपटारा करना होगा:

  • निर्विवाद दाखिल-खारिज: 7 दिन के भीतर
  • विवादित मामले: 11 दिनों की समय-सीमा
  • विशेषाधिकार प्राप्त रैयतों के लिए: अधिकतम 14 दिन
  • सामान्य त्रुटि या जाति सुधार: 15 दिन
  • जटिल मामले: अधिकतम 75 दिन

अधिकारियों का दावा है कि इन सुधारों का असर दिखना शुरू हो गया है। पिछले दो वर्षों में दाखिल-खारिज के ऑनलाइन निपटान की दर लगभग 25% से बढ़कर 75% हो गई है। मार्च 2026 तक 46 लाख से अधिक लंबित आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। यह पहल उन भूमि मालिकों के लिए एक वास्तविक मुक्ति का वादा करती है जो अंतहीन कतारों और जटिल कागजी कार्रवाई में फंसे हुए थे।

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