नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर जेडीयू विधायक सरयू राय ने दिया बड़ा बयान, कहा – ‘ऐसा लगता है कि ये सुनियोजित साजिश’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च को X पर राज्यसभा जाने का फैसला अपनी इच्छा बताया, लेकिन इस पर जेडीयू के भीतर सवाल उठे हैं। झारखंड से जेडीयू के इकलौते विधायक सरयू राय ने इसे मुख्यमंत्री पद से उन्हें साइडलाइन करने की सुनियोजित प्रक्रिया बताया। उनके बयान के बाद दिल्ली-पटना के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर जेडीयू विधायक सरयू राय ने दिया बड़ा बयान, कहा - 'ऐसा लगता है कि ये सुनियोजित साजिश'

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खुल गया है। गुरुवार, 5 मार्च को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ किया कि यह फैसला उनकी अपनी इच्छा से लिया गया है और नई सरकार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा। इसके तुरंत बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता और झारखंड से पार्टी के इकलौते विधायक सरयू राय का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इस पूरे कदम को अलग नजरिये से देखा।

सरयू राय ने कहा कि जिस तरीके से यह निर्णय सामने आया, उससे उन्हें यह प्रक्रिया सामान्य राजनीतिक बदलाव नहीं लगती। उनका दावा है कि नीतीश कुमार को सक्रिय मुख्यमंत्री की भूमिका से हटाकर राज्यसभा भेजना एक सुनियोजित साजिश जैसा दिखता है। राय ने यह भी जोड़ा कि अगर सम्मानजनक और स्पष्ट तरीके से उन्हें संसद भेजा जाता, तब आपत्ति की गुंजाइश कम होती।

“जिस तरह से उनके जैसे व्यक्ति को सीएम पद से हटाकर राज्यसभा के लिए भेजा गया है, ऐसा लगता है कि उन्हें किसी शेल्टर में भेजा जा रहा है। यह तरीका ठीक नहीं लगता।” — सरयू राय

सरयू राय ने दिल्ली-पटना गतिविधियों पर उठाए सवाल

जमशेदपुर वेस्ट से विधायक सरयू राय ने कहा कि पिछले दो दिनों में दिल्ली और पटना के बीच जो गतिविधियां चलीं, वे उन्हें स्वाभाविक नहीं लगीं। उनके मुताबिक घटनाक्रम की गति और प्रस्तुति इस ओर इशारा करती है कि निर्णय पहले से तय था और उसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस फैसले को सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

“पिछले दो दिनों से दिल्ली और पटना के बीच जो गतिविधियां हो रही हैं, ऐसा लगता है कि ये सुनियोजित तरीके से किया गया। नीतीश कुमार का दोस्त होने के बाद मैं इस फैसले को नहीं पचा पा रहा हूं।” — सरयू राय

राय ने अपने बयान में नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2005 से मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक दिशा पर असर डाला और सुशासन की चर्चा को मुख्यधारा में रखा। इसी पृष्ठभूमि में उनका कहना है कि ऐसे नेता की भूमिका बदलने की प्रक्रिया राजनीतिक तौर पर अधिक पारदर्शी होनी चाहिए थी।

घोषणा के बाद अटकलों पर विराम, लेकिन असंतोष भी सामने

नीतीश कुमार की X पोस्ट के बाद यह स्पष्ट हो गया कि राज्यसभा जाने को लेकर जो अटकलें चल रही थीं, उनमें अब आधिकारिक स्थिति सामने आ चुकी है। इससे पहले उनके बेटे निशांत कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाएं भी राजनीतिक हलकों में चल रही थीं। लेकिन पोस्ट के जरिए संदेश यह गया कि खुद मुख्यमंत्री ने ही अपनी आगे की संसदीय भूमिका तय की है।

फिर भी पार्टी के भीतर प्रतिक्रिया एकसमान नहीं दिखी। जेडीयू कार्यकर्ताओं के एक हिस्से में इस फैसले को लेकर नाराजगी की बात सामने आई है। यही कारण है कि यह मुद्दा सिर्फ पद परिवर्तन का नहीं, बल्कि पार्टी संगठन, नेतृत्व की आंतरिक प्रक्रिया और निर्णय की टाइमिंग से जुड़ा राजनीतिक प्रश्न बन गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में दो समानांतर दावे दिख रहे हैं—एक तरफ नीतीश कुमार का सार्वजनिक रुख कि निर्णय उनकी इच्छा से हुआ; दूसरी तरफ सरयू राय का आरोप कि इसे मुख्यमंत्री पद से उन्हें साइडलाइन करने की योजना की तरह देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में जेडीयू और सहयोगी दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि पार्टी इस विवाद को कैसे संभालती है और इसे नेतृत्व परिवर्तन की सामान्य प्रक्रिया बताती है या राजनीतिक संदेश के स्तर पर कोई नया स्पष्टीकरण देती है।

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Rishabh Namdev

4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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