Hindi News

“बिहार में नीतीश मॉडल ही चलेगा..” NDA बैठक में होगा नए मुख्यमंत्री के नाम पर निर्णय, सियासी हलचल के बीच उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा बयान

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की राजनीति में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे, क्योंकि वे राज्यसभा में शपथ ले चुके हैं। कुशवाहा ने बताया कि नए मुख्यमंत्री का चुनाव NDA के सभी घटक दलों की सहमति से होगा, जिसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
“बिहार में नीतीश मॉडल ही चलेगा..” NDA बैठक में होगा नए मुख्यमंत्री के नाम पर निर्णय, सियासी हलचल के बीच उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा बयान

राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना लौट आए हैं। उनके वापस आते ही बिहार की राजनीति में एक नई हलचल मच गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सुप्रीमो और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने एक बड़ा और सीधा बयान दिया है। कुशवाहा ने साफ कहा कि नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। उनका यह बयान नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री पद को लेकर राज्य में जारी अटकलों के बीच आया है, जिससे सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है और भविष्य की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब जेडीयू के कई नेता यह कह चुके हैं कि नियमानुसार नीतीश कुमार छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं।

उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बयान में पूरी स्पष्टता से कहा, “नीतीश कुमार ने राज्यसभा में शपथ ग्रहण कर लिया है। अब यह पूरी तरह तय हो चुका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पद पर नहीं रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि इस्तीफे का समय पूरी तरह से नीतीश कुमार का व्यक्तिगत विषय होगा। कुशवाहा ने साफ किया कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि नीतीश कुमार आज इस्तीफा देते हैं, कल देते हैं या कब देते हैं, क्योंकि यह उनका निजी फैसला है। उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में आने वाले बड़े बदलाव का संकेत दे दिया है।

यह महत्वपूर्ण है कि नीतीश कुमार ने हाल ही में राजद के साथ गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ मिलकर एनडीए सरकार बनाई थी। इसके बाद से ही उनके भविष्य को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य न हो, वह मुख्यमंत्री पद पर छह महीने तक रह सकता है। राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद, नीतीश कुमार औपचारिक रूप से अब संसद के सदस्य बन गए हैं, जिसका सीधा अर्थ यह है कि वे बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में, उपेंद्र कुशवाहा का यह बयान कि वे मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे, इस संवैधानिक स्थिति को रेखांकित करता है और उनके अगले कदम की ओर इशारा करता है।

उपेंद्र कुशवाहा ने बताई नए मुख्यमंत्री की चयन प्रक्रिया

नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया पर उपेंद्र कुशवाहा ने विस्तार से जानकारी दी, जिससे भविष्य की राजनीतिक रूपरेखा स्पष्ट होती है। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार कभी भी अपना इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन उससे पहले एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। एनडीए के सभी घटक दलों को सबसे पहले अपने-अपने विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें करनी होंगी। इन आंतरिक बैठकों में प्रत्येक दल अपने विधायक दल का नेता चुनेगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद, एनडीए के सभी घटक दलों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। एक बार नाम तय हो जाने के बाद, राज्यपाल के पास नए मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। कुशवाहा ने इस पूरी प्रक्रिया को एनडीए गठबंधन की लोकतांत्रिक और पारदर्शी कार्यप्रणाली का हिस्सा बताया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और सभी की सहमति से हो।

खुद के मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने क्या कहा?

जब उपेंद्र कुशवाहा से उनके खुद के मुख्यमंत्री बनने की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर मुस्कुराते हुए केवल “धन्यवाद” कहकर जवाब दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक राजनीतिक माहौल है जिसमें हर किसी की जिज्ञासा है, और देश के लोगों में भी यह जानने की उत्सुकता है कि बिहार की राजनीति में अगला कदम क्या होगा। उनके इस संक्षिप्त और विनम्र जवाब ने जहां एक ओर सीधे तौर पर अपनी दावेदारी को खारिज नहीं किया, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक मर्यादा के साथ टाल भी दिया। उनकी प्रतिक्रिया ने राजनीतिक हलकों में और अटकलें लगाने का मौका छोड़ दिया है, खासकर ऐसे समय में जब मुख्यमंत्री पद को लेकर कई नाम चर्चा में हैं।

क्या एनडीए में सबकुछ ठीक है?

एनडीए गठबंधन में किसी भी तरह की आंतरिक खटपट या मनमुटाव की खबरों को उपेंद्र कुशवाहा ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “एनडीए में सब सहज है, कुछ खटपट नहीं है।” उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि गठबंधन के भीतर सबकुछ ठीक चल रहा है और महत्वपूर्ण फैसले आपसी सहमति और समन्वय से ही लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अब नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य हो गए हैं, तो वे और नीतीश कुमार सदन में एक साथ बैठेंगे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी अच्छा लगेगा। कुशवाहा ने यह भी कहा कि वे अब नीतीश कुमार के साथ बैठकर सदन में सवाल करेंगे, जिसका अर्थ है कि उनकी भूमिका अब राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गई है और वे बिहार से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाएंगे।

निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर उपेंद्र कुशवाहा का बयान

जेडीयू के कुछ नेताओं द्वारा निशांत को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह उनका (जेडीयू नेताओं का) व्यक्तिगत विषय है। उन्होंने इस पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि एनडीए गठबंधन में विभिन्न दलों को अपने-अपने नेता चुनने का अधिकार है और इस मामले में कोई बाहरी दल हस्तक्षेप नहीं करेगा। यह बयान एक तरह से जेडीयू के आंतरिक मामलों में दखल न देने की नीति को भी दर्शाता है और गठबंधन के भीतर हर दल की स्वायत्तता का सम्मान करने की बात सामने आती है।

बिहार में नीतीश मॉडल ही चलेगा- उपेंद्र कुशवाहा

नीतीश युग के अंत होने के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने एक महत्वपूर्ण और बारीक स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि “बिहार में नीतीश मॉडल ही चलेगा” और “नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की सरकार चलेगी।” यह बयान उनके पहले दिए गए बयान, कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे, से विरोधाभासी लग सकता है। हालांकि, इसे इस तरह समझा जा सकता है कि भले ही नीतीश कुमार सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन न हों, लेकिन बिहार की विकास और शासन व्यवस्था पर उनकी विचारधारा और कार्यशैली का गहरा प्रभाव बना रहेगा। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि वे परदे के पीछे से या एक अनुभवी मार्गदर्शक के रूप में सरकार का नेतृत्व करते रहेंगे, जिससे बिहार की राजनीति में उनकी केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी। कुशवाहा के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि नीतीश कुमार का प्रभाव भले ही पद से न दिखे, लेकिन नीति और दिशा-निर्देशों में उनका योगदान निरंतर जारी रहेगा। यह बिहार की राजनीति के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है, जहां एक अनुभवी नेता का मार्गदर्शन और उनका स्थापित ‘मॉडल’ सरकार की दिशा तय करता रहेगा, भले ही संवैधानिक पद पर कोई और व्यक्ति आसीन हो। यह बिहार की आगे की राजनीतिक रणनीति का एक अहम संकेत देता है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
Follow Us :GoogleNews