आज, जब दुनिया भर की नजरें पाकिस्तान में होने वाली महत्वपूर्ण शांति वार्ताओं पर टिकी हैं, सोने के भाव ने एक बार फिर निवेशकों को अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है। 11 अप्रैल, 2026, शनिवार का दिन है और वैश्विक बाजार बड़ी उम्मीद से इन वार्ताओं के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद, इजराइल का लेबनान पर हमला न रोकने का ऐलान और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर पकड़ मजबूत करने से जहाजरानी ठप पड़ी है। ऐसे में, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और ईरान के प्रतिनिधिमंडल के बीच पाकिस्तान में शुरू होने वाली ये बातचीत ही युद्ध समाप्ति की एकमात्र उम्मीद है। हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ कर दिया है कि अगर वार्ता विफल हुई तो हमले फिर से शुरू हो जाएंगे, और इन अनिश्चितताओं के चलते सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
आपको बता दें कि इस उतार-चढ़ाव भरे माहौल में आज सोने के भाव कुछ इस प्रकार हैं: 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम के लिए आपको 1,52,551 रुपये चुकाने होंगे। वहीं, 22 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव 1,39,845 रुपये है। 18 कैरेट सोने की कीमत 1,14,419 रुपये दर्ज की गई है। चांदी भी 2,43,087 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। गौर कीजिए, जनवरी 2025 में 80 हजार रुपये पर बिक रहा सोना एक साल में एक लाख रुपये बढ़ गया है, जिससे आम लोगों और खासकर मध्यम वर्ग के लिए आभूषण खरीदना एक अवास्तविक सपना बनता जा रहा है। दिसंबर 2025 में जो सोना 1,35,000 रुपये का था, वो अचानक 1,80,000 रुपये तक पहुंच गया था और अब वैश्विक परिस्थितियों के कारण इसमें थोड़ी गिरावट देखी जा रही है।
आमतौर पर युद्ध के दौरान सोने की कीमतें आसमान छू जाती हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। ईरान-अमेरिका युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों के चलते सोने पर दबाव है। युद्ध के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का उच्च होना, केंद्रीय बैंकों को सोने को बेचकर मुनाफा कमाने के लिए मजबूर कर रहा है। फेडरल रिजर्व भी तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति के कारण ब्याज दरों में कटौती करने में असमर्थ रहा है, जिससे बॉन्ड यील्ड बढ़ी है और निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह सब सोने की कीमतों में गिरावट का कारण बन रहा है, जो शादी के इस मौसम में खरीदारों के लिए एक अवसर भी पैदा कर सकता है।
सोने के निवेशकों के लिए यह असमंजस का समय है। इस साल सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद, सोना अब गिरावट के संकेत दे रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की राय कुछ और ही कहती है। मॉर्गन स्टेनली से लेकर गोल्डमैन सैक्स तक, सभी का मानना है कि इस साल के अंत तक सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उनका अनुमान है कि तेल की कीमतों में गिरावट के बाद सोना एक बार फिर आसमान छूएगा। यही वजह है कि जो लोग सोने को दीर्घकालिक निवेश मानते हैं, वे इस अवसर पर खरीदारी कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान में होने वाली वार्ताएं क्या रंग लाती हैं और विश्व बाजार, खासकर सोने पर इसका क्या असर होता है।






