मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली है। इस शपथ ग्रहण के तुरंत बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए सरकार पर सीधा हमला बोला। तेजस्वी यादव ने साफ कहा कि राज्यसभा जाना नीतीश कुमार की अपनी मर्जी नहीं थी, बल्कि उन पर यह फैसला थोपा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह उनकी अपनी इच्छा होती तो वे चुनाव से पहले भी इस बारे में बोल सकते थे। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अचानक यह इच्छा नहीं जगी होगी, यह बात स्पष्ट है।
राजद नेता ने एनडीए सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता ने एनडीए सरकार पर जनता से किए गए वादों को तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने याद दिलाया कि चुनाव के वक्त तो एनडीए के तमाम नेता लगातार यह दावा कर रहे थे कि 2025 तक नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। फिर अचानक यह बड़ा बदलाव क्यों किया जा रहा है? उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नीतीश कुमार का खुद का फैसला नहीं है, बल्कि किसी बाहरी दबाव या गठबंधन के भीतर की खींचतान के चलते उन पर जबरन थोपा गया है। तेजस्वी यादव ने हैरानी जताते हुए पूछा कि इतने बड़े जनादेश के बाद भी बिहार की सरकार में यह बदलाव आखिर किस मजबूरी में किया जा रहा है? उनके इस बयान से यह स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि एनडीए गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, और राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनता जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा तंज कसते हुए कहा,
“नीतीश कुमार ने राज्यसभा की शपथ ली है, कोई प्रधानमंत्री पद की नहीं।”
यह बयान उन राजनीतिक अटकलों पर सीधा वार था, जिनमें नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति में जाने या प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनने की चर्चाएं थीं। तेजस्वी ने इशारा किया कि इस फैसले के पीछे कोई बड़ी राजनीतिक मजबूरी या अंदरूनी दबाव काम कर रहा है, जो नीतीश कुमार को यह कदम उठाने पर मजबूर कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने जिस जनादेश के साथ इस सरकार को चुना था, उस जनादेश का इस तरह के फैसलों से अपमान हो रहा है।
गैस की किल्लत पर तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला
तेजस्वी यादव सिर्फ नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण और राजनीतिक फेरबदल तक ही नहीं रुके। उन्होंने राज्य सरकार को एलपीजी गैस की किल्लत और इससे आम लोगों को हो रही भारी परेशानियों को लेकर भी घेरा। उन्होंने बताया कि राज्य में गैस की भारी कमी की वजह से बिहार से बाहर दूसरे राज्यों में काम करने वाले बड़ी संख्या में मजदूर वापस अपने घर लौट रहे हैं। यह स्थिति बिहार के लिए एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौती बन गई है, जिस पर सरकार का ध्यान नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार इन लौटते हुए मजदूरों के लिए किसी भी तरह की कोई ठोस व्यवस्था करने में विफल रही है। यहां तक कि इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई गंभीर चर्चा भी नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार की इस उदासीनता पर कड़े स्वर में अपना विरोध जताते हुए कहा,
“इन लोगों का तो बस काम ही है कि भांड में जाए बिहार, लेकिन अपनी कुर्सी पर हम बने रहें।”
यह बयान सरकार की प्राथमिकताओं पर एक सीधा और तीखा हमला था, जिसमें तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार को केवल अपनी राजनीतिक कुर्सी और सत्ता की चिंता है, जबकि बिहार और उसके मेहनतकश लोगों की परेशानियों से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।
तेजस्वी यादव ने यह भी सवाल उठाया कि अगर मुख्यमंत्री पद में बदलाव होता है, तो अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा? और क्या उस नए मुख्यमंत्री को जनता का मैंडेट यानी जनादेश प्राप्त है? उन्होंने सरकार में बैठे लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग काम करने वाले थोड़े ही हैं। ये लोग तो बिहार को बदनाम करने और राज्य को बर्बाद करने का काम कर रहे हैं। इन तीखे बयानों से यह साफ हो गया है कि बिहार की राजनीति में एक नया और बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है, और विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की तैयारी में है।
राजनीतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कब अपनी कुर्सी छोड़ेंगे। उनके राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने के इस फैसले को भी इसी राजनीतिक कड़ी में देखा जा रहा है, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। तेजस्वी यादव के बयानों ने इन अटकलों को और ज्यादा हवा दे दी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है और अंदरूनी खींचतान सतह पर आ गई है। बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी बड़े और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है।
जनादेश पर सवाल उठाने को लेकर तेजस्वी यादव का बयान
तेजस्वी यादव ने जिस तरह से जनादेश और जनता की मर्जी पर सवाल उठाया है, वह मौजूदा सरकार की वैधता पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उनका साफ कहना है कि जनता ने जिस दल या गठबंधन को सत्ता सौंपी थी, उसके मूल वादों से पीछे हटना और अपनी प्राथमिकताओं को बदलना जनता के साथ एक बड़ा धोखा है। यह स्थिति न केवल राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास और कटुता बढ़ा रही है, बल्कि बिहार की आम जनता के मन में भी कई गंभीर सवाल पैदा कर रही है कि आखिर राज्य की सत्ता और उसके भविष्य की दिशा क्या होगी।
कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के राज्यसभा शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया और अनिश्चितता भरा अध्याय खुल गया है। तेजस्वी यादव के लगातार तीखे हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है। विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है और इस राजनीतिक फेरबदल को जनता के सामने उजागर कर रहा है। एलपीजी किल्लत और मजदूर वापसी जैसे ज्वलंत सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक हमले के साथ जोड़कर तेजस्वी यादव ने अपनी बात को और भी धार दी है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है।






