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बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर विवाद, RLM विधायक माधव आनंद की मांग पर JDU ने दिया यह जवाब

Written by:Ankita Chourdia
Published:
बिहार विधानसभा में NDA सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने 2016 से लागू शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई। JDU प्रवक्ता अभिषेक झा ने साफ किया कि समीक्षा की आड़ में ढील देने की कोशिश नहीं चलेगी और नीतीश कुमार सरकार इस कानून को मजबूती से लागू रखेगी।
बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर विवाद, RLM विधायक माधव आनंद की मांग पर JDU ने दिया यह जवाब

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। मंगलवार 17 फरवरी को विधानसभा में NDA के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने इस कानून की समीक्षा की मांग रखी। वर्ष 2016 से प्रदेश में लागू इस कानून को लगभग 10 साल पूरे हो चुके हैं, और अब इसकी समीक्षा को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

माधव आनंद की मांग के बाद JDU ने अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। जेडीयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने बिना नाम लिए अपने ही गठबंधन के साथी विधायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी कानून की समय-समय पर समीक्षा होती रही है और शराबबंदी की भी समीक्षा होती रही है।

समीक्षा की आड़ में ढील नहीं चलेगी

अभिषेक झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक विधायक ने सदन में बयान दिया है कि समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन समीक्षा का मतलब क्या है यह तो वही बता सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई समीक्षा की आड़ में ढिलाई चाहता है या इसे समाप्त करना चाहता है तो ऐसा नहीं हो सकता।

जेडीयू प्रवक्ता का संकेत साफ था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में इतने वर्षों तक शराबबंदी कानून को मजबूती से लागू रखा है और आगे भी रखेंगे। जो लोग ऐसे बयान दे रहे हैं उनका दिल्ली प्रवास होता रहता है। अभिषेक झा ने इशारों में कहा कि हमें लगता है बिहार में शराबबंदी है लेकिन अन्य प्रदेशों में शराबबंदी नहीं है, इसलिए शायद ऐसी मांग उठाई जा रही है।

AIMIM ने कानून को बताया पूरी तरह फेल

वहीं AIMIM के विधायक अख्तरुल ईमान ने शराबबंदी कानून को पूरी तरह से फेल करार दिया। उनका आरोप है कि बिहार में शराब की होम डिलीवरी हो रही है और शराब माफिया को सरकार और पुलिस का संरक्षण हासिल है। अख्तरुल ईमान ने चेतावनी देते हुए कहा कि शराबबंदी होने की वजह से नई पीढ़ी सूखे नशे की चपेट में आ गई है।

दूसरी तरफ बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून सदन में सभी दलों की सहमति से लागू किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू था, लागू है और लागू रहेगा।

RJD ने मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

इस पूरे विवाद पर RJD के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि शराबबंदी की पोल तो सत्ता धारी दल के विधायक ही सदन में खोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधायक कह रहे हैं शराबबंदी की समीक्षा होनी चाहिए, इसका मतलब यह है कि शराबबंदी से शराब माफिया की चांदी हो रही है।

मृत्युंजय तिवारी ने आगे कहा कि जहरीली शराब से लोगों की मौत हो रही है और मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए। अब तो उन्हीं के घटक दल के नेता शराबबंदी की पोल खोल रहे हैं। RJD ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

बिहार में 2016 से शराबबंदी कानून लागू होने के बाद कई बार इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं। जहरीली शराब से होने वाली मौतें और अवैध शराब की तस्करी के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। ऐसे में विधानसभा में उठी यह मांग एक बार फिर इस कानून की कार्यप्रणाली पर बहस को जन्म दे सकती है।

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