पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव से ठीक पहले एनडीए के भीतर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने गठबंधन में एक राज्यसभा सीट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। मांझी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले किया गया एक पुराना वादा याद दिलाया है, जिससे एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
शनिवार को गया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मांझी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी पार्टी को एक राज्यसभा सीट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि एक वादा है जिसे पूरा किया जाना बाकी है।
वादे की याद दिलाई
जीतन राम मांझी ने अपने दावे को पुख्ता करते हुए कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी पार्टी को आम चुनाव से पहले दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का आश्वासन दिया था।
“2024 के आम चुनाव से पहले, बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने हमें लोकसभा में दो और राज्यसभा में एक सीट देने का वादा किया था। लेकिन हमें केवल एक लोकसभा सीट मिली, और हमने उसे एनडीए के लिए जीता। राज्यसभा सीट को लेकर किया गया वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। मैं इसके लिए कोई मांग नहीं कर रहा हूं, लेकिन हमारी पार्टी को कम से-कम एक राज्यसभा सीट तो मिलनी ही चाहिए।”- जीतन राम मांझी, प्रमुख, HAM
मांझी के इस बयान ने उस समय हलचल मचा दी है जब एनडीए ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की है।
कैसा है चुनावी कार्यक्रम और सीटों का गणित?
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च है, जबकि 9 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकते हैं।
जिन पांच सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, वे अप्रैल में खाली होंगी। इनमें जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और राम नाथ ठाकुर, आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह, और एनडीए के सहयोगी दल आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा की सीट शामिल है। इन पांच में से तीन सीटों पर फिलहाल एनडीए का कब्जा है।
विपक्ष की क्या है स्थिति?
दूसरी ओर, विपक्षी महागठबंधन भी एक सीट जीतने की जुगत में है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं, जिसमें कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या बल से वे कुछ पीछे हैं। सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन एक सीट हासिल करने के लिए AIMIM और बसपा जैसे दलों के समर्थन पर निर्भर हो सकता है, जिनके साथ उनका औपचारिक गठबंधन नहीं है।






