बिहार: RLM के भाजपा में विलय की खबरों पर विराम, उपेंद्र कुशवाहा ने खोले पत्ते, बोले- सलाह मिली थी, दबाव नहीं

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भाजपा में विलय की खबरों पर विराम लगाते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी विलय की सलाह जरूर मिली थी लेकिन किसी भी प्रकार की शर्त या दवाब नहीं था।
Upendra Kushwaha

एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर बिहार की प्रमुख पार्टी में से एक राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय की खबरों को काफी हवा दी गई। जिसको लेकर पार्टी प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी के भाजपा विलय की अटकलों पर बड़ा बयान दिया है।

उपेंद्र कुशवाह ने बताया कि उन्हें भाजपा की ओर से पार्टी विलय की सलाह जरूर मिली थी, लेकिन किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया गया था। इस संबंध में उन्होंने आगे कहा कि लोगों ने सलाह के रूप में कहा कि पार्टी का विलय कर लीजिए। लेकिन वह कोई शर्त या दबाव नहीं था। सलाह तो बहुत लोग देते हैं, उसे मानना या नहीं मानना हमारे ऊपर है।

भाजपा के साथ आरएलएम के रिश्ते पर बोले उपेंद्र कुशवाहा

आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा के साथ रिश्तों पर भी अपनी बात रखी। हालही में जब उनके बेटे को बिहार एमएलसी का टिकट नहीं दिया गया तब ऐसी खबरें थी कि भाजपा और आरएलएम के बीच दूरियां बढ़ना शुरू हो गई हैं और आरएलएम, एनडीए का साथ छोड़ सकती है। लेकिन इस प्रकार की तमाम खबरों पर उपेंद्र कुशवाह ने विराम लगा दिया है।

उपेंद्र कुशवाह ने कहा कि दोनों दलों के बीच किसी भी प्रकार की नाराजगी है। न तो पहले नाराजगी थी और न अब है। उन्होंंने तर्क देते हुए कहा कि परिवार में भी मतभेद होते हैं, लेकिन इसका मतलब रिश्ते खराब होना नहीं होता। भाजपा और हमारी पार्टी के बीच सब कुछ सामान्य है।

जेडीयू के नेतृत्व पर उपेंद्र कुशवाह का बड़ा बयान

इस बीच, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेतृत्व को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाह ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हर बड़े नेता की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बाद पार्टी के लिए मजबूत नेतृत्व तैयार करे, लेकिन इस मामले में नीतीश कुमार से चूक हुई है।

कुशवाह ने कहा, नीतीश जी बड़े नेता हैं और बिहार के विकास के लिए उन्होंने काफी काम किया है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन उनके बाद पार्टी का नेतृत्व कौन संभालेगा, इसकी स्पष्ट व्यवस्था करना भी उनकी जिम्मेदारी थी। इस दिशा में जो कदम उठाए जाने चाहिए थे, वे नहीं उठाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। निजी बातचीत के दौरान नीतीश कुमार कई वर्षों से सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर राज्यसभा जाने जैसी इच्छा व्यक्त करते रहे थे।

Shyam Dwivedi
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Shyam Dwivedi

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