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बिहार: दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडराया खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने सम्राट सरकार और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस, जानें पूरा मामला

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
सुप्रीम कोर्ट दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। इस मामले में कोर्ट ने बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बिहार में सम्राट सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश पर संकट मंडराने लगा है। एक तरफ जहां बिहार MLC की सीट नहीं मिली तो वहीं अब मंत्री पद भी हाथ से जाने की उम्मीद दिखाई दे रही है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश के मंत्री पद के संबंध में बिहार सरकार और चुनाव आयोग को एक नोटिस जारी कर दिया है।

दरअसल, दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं। फिर भी बिहार सरकार में वे मंत्री पद पर बने हुए हैं। पहली बार दीपक प्रकाश 20 नवंबर 2025 को पंचायती राज मंत्री बने थे। इसके बाद, राज्य में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद उन्होंने 7 मई 2026 को दोबारा पंचायती राज मंत्री पद की शपथ ली। लेकिन अभी तक वे किसी भी राज्य सदन के सदस्य नहीं है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।

इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा कि क्या दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री पद पर हैं? इस पर याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि वे अभी भी मंत्री बने हुए हैं। इसके बाद कोर्ट ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।

अवधि पूरी होने के बाद भी मंत्री पद पर बने दीपक प्रकाश

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने बताया कि दीपक प्रकाश न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं, इसलिए उन्हें मंत्री नहीं बनाया जा सकता है, क्योंकि यह संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोई गैर-विधायक अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे राज्य विधानमंडल का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। साथ ही, यह संवैधानिक छूट केवल एक बार के लिए उपलब्ध है और सरकार बदलने की स्थिति में इसका दोबारा लाभ नहीं लिया जा सकता।

याचिका के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को अपनी नई सरकार में दीपक प्रकाश को मंत्री नियुक्त किया था। उस समय वे विधानसभा के सदस्य नहीं थे। बाद में 15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया।

सम्राट सरकार में दीपक प्रकाश को दोबारा मिला मंत्री पद

इसके 22 दिन बाद, 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ, जिसमें दीपक प्रकाश को फिर से मंत्री बना दिया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि 20 नवंबर 2025 से गणना करने पर मंत्री पद पर बने रहने की छह महीने की संवैधानिक अवधि 20 मई 2026 को ही समाप्त हो गई थी। इसलिए इसके बाद उनका मंत्री पद पर बने रहना संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। बता दें कि मंत्री दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। बिहार में RLM, एनडीए की सहयोगी पार्टी है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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