लोकसभा में बुधवार 1 अप्रैल को जन विश्वास विधेयक 2026 पर जोरदार बहस हुई है। दरअसल इस चर्चा में पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने हिस्सा लिया और विधेयक की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत एक तीखी टिप्पणी के साथ की और कहा, “गोबर पर जितना भी घी डालिए, महक घी की नहीं आती।” उनका इशारा इस विधेयक की मूल सोच की ओर था, जिसे उन्होंने जनहित के खिलाफ बताया है।
दरअसल पप्पू यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि देश की स्थिति ऐसी होती जा रही है कि हम धीरे-धीरे तानाशाही और नौकरशाही की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उनका मानना है कि यह विधेयक इस प्रवृत्ति को और मजबूत करेगा, जिससे आम जनता के अधिकार कमजोर होंगे और सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ेगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि यह बिल जनता का विश्वास जीतने के बजाय उसे तोड़ने का काम कर रहा है।
भ्रष्टाचार का दरवाजा खुलेगा, छोटे व्यापारी पिसेंगे
वहीं पप्पू यादव ने विधेयक के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर यह कानून किसानों, मजदूरों, साहित्यकारों, पत्रकारों या युवाओं के हित में लाया गया होता तो इसकी उपयोगिता समझ आती। उन्होंने कहा कि छोटे और लघु व्यापारी इस विधेयक से बाहर रह जाएंगे, जबकि बड़े उद्योगपति और पूंजीपति इसका फायदा उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बिल में हर मुद्दे पर नौकरशाहों के पास जाने की व्यवस्था की गई है, जिससे भ्रष्टाचार का एक नया रास्ता खुल सकता है। यादव के अनुसार यह विधेयक छोटे व्यापारियों पर बोझ बढ़ाएगा, जबकि बड़े लोगों को मनमानी करने का मौका देगा।
नकली दवाओं के कारोबार पर भी चिंता जताई
दरअसल सांसद पप्पू यादव ने अपने भाषण में नकली दवाओं के कारोबार पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि इस विधेयक में नकली दवाओं के खिलाफ सख्त प्रावधान नहीं हैं। उन्होंने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि नकली दवाइयों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, वे दवाइयों के नाम कैसे पहचानेंगे और असली-नकली का फर्क कैसे समझ पाएंगे। यादव ने नकली दवा बेचने वालों पर केवल पांच लाख रुपये के जुर्माने के प्रावधान पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नकली दवा बेचकर करोड़ों और अरबों रुपये कमाए जाते हैं, ऐसे में पांच लाख रुपये का जुर्माना उन्हें रोकने के लिए बहुत कम है। उनके अनुसार यह प्रावधान नकली दवा कारोबारियों को रोकने के बजाय उन्हें बढ़ावा दे सकता है।
प्रदूषण के मुद्दे पर भी पप्पू यादव ने अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि प्रदूषण फैलाने के लिए अक्सर बड़े उद्योग और बड़े कारखाने जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए ऐसे बड़े कारोबारियों को छूट दी जा रही है, जबकि इसका असर आम लोगों को झेलना पड़ता है। उनके अनुसार सरकार छोटे लोगों पर कार्रवाई करती है, लेकिन बड़े प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाते हैं।
महिला सुरक्षा और नागरिक अधिकारों पर खतरा
महिला सुरक्षा और नागरिक सम्मान के मुद्दे पर भी पप्पू यादव ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा है, “आज सबसे ज्यादा प्रताड़ित हमारी बेटियां हैं, चाहे हिंसा घर में हो या बाहर हो।” उनका कहना है कि इस विधेयक में महिला सुरक्षा को लेकर कोई मजबूत प्रावधान नहीं हैं, जिससे महिलाओं की स्थिति और कमजोर हो सकती है। उनके अनुसार यह विधेयक समाज के कमजोर वर्गों की चिंताओं को दूर करने में सफल नहीं है।
निर्दलीय सांसद ने आगे कहा है कि देश में कई कानूनों के तहत आम लोगों को, खासकर आंदोलन करने वाले छात्रों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बड़े उद्योगपति और अमीर लोग दलालों के साथ मिलकर देश के संसाधनों पर कब्जा कर रहे हैं, जबकि सरकार उनके हित में काम कर रही है। पप्पू यादव ने तंज करते हुए कहा है कि अगर सरकार को ऐसा ही करना है तो वह पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के हिसाब से ही सरकार चलाए, नकली दवाओं को खुली छूट दे दे और डॉक्टरों को भी नकली दवाइयां लिखने की आजादी दे दे। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे पूरा अधिकार उद्योगपतियों को दे दिया गया है।






