Hindi News

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री आवास खाली करने के सवाल पर तेजस्वी यादव का तंज, बोले- तो आप क्या चाहते हैं, जाके मदद कर दें?

Written by:Gaurav Sharma
Published:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार, 11 अप्रैल, 2026 से एक अणे मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास को खाली करना शुरू कर दिया है। वह अब 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में शिफ्ट हो रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तल्ख टिप्पणी करते हुए चुटीले अंदाज में कहा, "तो आप क्या चाहते हैं, जाके मदद कर दें?" तेजस्वी ने इस दौरान बीजेपी और आरएसएस पर तानाशाही थोपने का आरोप भी लगाया।
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री आवास खाली करने के सवाल पर तेजस्वी यादव का तंज, बोले- तो आप क्या चाहते हैं, जाके मदद कर दें?

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक अणे मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास सीएम हाउस को खाली करना शुरू कर दिया है। शनिवार, 11 अप्रैल, 2026 से उनके सामान को 7 सर्कुलर रोड स्थित नए बंगले में शिफ्ट करने का काम जारी है। यह मुख्यमंत्री आवास राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इस तरह के बदलाव को अक्सर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरीकों से देखा जाता है। इस पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पहली प्रतिक्रिया काफी तल्ख और व्यंगात्मक रही, जो बिहार की सियासी फिजां में गरमाहट घोल रही है।

पत्रकारों ने जब तेजस्वी यादव से नीतीश कुमार के सामान शिफ्ट होने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने सीधे तौर पर जवाब देने के बजाय चुटीले अंदाज में अपनी बात रखी। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा, “तो आप क्या चाहते हैं, जाके मदद कर दें?” यह बयान मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बीच चल रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर जुबानी जंग देखने को मिली है, और नीतीश कुमार के इस कदम पर तेजस्वी का यह जवाब अप्रत्याशित नहीं था। मुख्यमंत्री का यह आवास बदलना, भले ही प्रशासनिक कारणों से हो, लेकिन राज्य की राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

तेजस्वी यादव का बीजेपी-आरएसएस पर सीधा हमला और राजनीतिक लामबंदी

सीएम आवास खाली करने के सवाल के ठीक बाद, तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी तीखा हमला बोला। पटना के एसके मेमोरियल हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और बीजेपी देश में तानाशाही थोपना चाहती हैं। तेजस्वी ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि यह वक्त आपस में छोटी-मोटी लड़ाइयां लड़ने का नहीं है, बल्कि उन ‘दुश्मनों’ से लड़ने का है जो देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह बयान मौजूदा राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव और क्षेत्रीय दलों के लिए उसकी चुनौती को रेखांकित करता है।

कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी ने संगठन की मजबूती पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए एसके मेमोरियल हॉल जैसी जगहें अब छोटी पड़ रही हैं और भविष्य में उन्हें बड़े स्थलों पर आयोजित किया जाना चाहिए, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता और जनसमर्थन का संकेत है। उन्होंने आरजेडी कार्यकर्ताओं से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और देश में चल रही गतिविधियों को गहराई से समझने की अपील की। तेजस्वी ने धर्म आधारित भड़काऊ भाषणों की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे नेताओं का पुरजोर विरोध होना चाहिए, चाहे वे हिंदू धर्म से हों या इस्लाम से। उन्होंने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर वे खुद भी धर्म को उकसाने वाली या नफरत फैलाने वाली बात करें, तो उनका भी विरोध किया जाना चाहिए। यह बयान उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि को मजबूत करने और समाज में सद्भाव का संदेश देने का प्रयास था।

तेजस्वी यादव ने किया लालू यादव के राजनीतिक इतिहास का जिक्र

तेजस्वी यादव ने जनता से बीजेपी और आरएसएस के मंसूबों को पहचानने की अपील की। उन्होंने बंगाल के एक कथित वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी हजार करोड़ रुपये देकर ‘हुमायूं’ जैसे लोगों को फायदा पहुंचाना चाहती है, ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि लोग इन संगठनों की नीतियों और कार्यप्रणाली को समझें, जो उनके अनुसार समाज को बांटने और एक विशेष विचारधारा थोपने का काम करती हैं। अपनी इस बात को पुष्ट करने के लिए तेजस्वी ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर फक्र है कि वे लालू जी के बेटे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि लालू प्रसाद यादव ने एक समय बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की विवादास्पद रथ यात्रा को बिहार में रोकने का काम किया था। यह कदम देश की धर्मनिरपेक्ष राजनीति के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है, जिसने बीजेपी के उदय को एक समय के लिए चुनौती दी थी।

आरजेडी विधायक पर लगे आरोपों पर तेजस्वी का बयान

आरजेडी विधायक ओसामा पर लगे आरोपों को लेकर भी तेजस्वी यादव ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ओसामा पर ‘झूठा केस’ किया गया है और जनता ने यह देखा है कि कैसे उनके परिवार और पार्टी के कई नेताओं पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। तेजस्वी ने दृढ़ता से कहा कि जब उनके पिता लालू जी ऐसी चुनौतियों के सामने नहीं झुके, तो उनका बेटा भी नहीं झुकेगा। यह बयान उनकी पार्टी और परिवार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और संघर्ष जारी रखने के उनके संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाला दिन आरजेडी और उनके समर्थकों का होगा, जब वे जनता के समर्थन से सत्ता में वापस आएंगे। कार्यक्रम में जुटे सभी लोगों से उन्होंने एक साथ रहने और एकजुट होकर काम करने की अपील की। तेजस्वी ने अपनी कुछ संभावित गलतियों को स्वीकार करते हुए सबके लिए मिल-जुलकर काम करने का संकल्प दोहराया, जो एक परिपक्व नेता की निशानी है और उनकी पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देता है। यह संबोधन बिहार की आगामी राजनीति के लिए एक मजबूत संकेत था।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews