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पीएम मोदी की मेलोडी टॉफी वाले वायरल वीडियो पर पप्पू यादव ने कसा तंज, बोले- ‘आपकी हिपोक्रेसी की कोई सीमा नहीं…’

Written by:Ankita Chourdia
Last Updated:
पीएम मोदी और इटली की पीएम मेलोनी का 'मेलोडी टॉफी' वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वहीं अब इस पर पप्पू यादव ने तंज कसा है। चलिए जानते हैं पप्पू यादव ने क्या कहा?
पीएम मोदी की मेलोडी टॉफी वाले वायरल वीडियो पर पप्पू यादव ने कसा तंज, बोले- ‘आपकी हिपोक्रेसी की कोई सीमा नहीं…’

इटली में हुए शिखर सम्मेलन में यूं तो कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई और दुनिया भर के बड़े नेता एक मंच पर इकट्ठा हुए, लेकिन एक चीज़ जिसने सोशल मीडिया पर सबकी निगाहें खींची, वो है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से जुड़ा एक ख़ास वीडियो। आज हम उसी वीडियो की बात करेंगे, जिसमें पीएम मोदी इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को एक बेहद ख़ास तोहफ़ा देते नज़र आ रहे हैं जी हां, वही अपनी बचपन की पसंदीदा ‘मेलोडी टॉफी’।

दरअसल ये वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है और इसकी वजह है ‘मेलोडी टॉफी’। खुद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया, जिसके बाद से ये वीडियो लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। जहां एक ओर यूज़र्स इसे एक मजेदार और दिल छू लेने वाले पल के तौर पर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के नेता इस पर तंज कसने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।

पप्पू यादव ने कसा तंज

वहीं इस वायरल वीडियो पर बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जॉर्जिया मेलोनी के वीडियो को रिपोस्ट करते हुए अपने एक्स हैंडल से एक तीखा कमेंट किया है। पप्पू यादव ने लिखा, “माननीय PM साहब, इटली की PM को Melody और भारत के लोगों के साथ ट्रेजेडी, सर आपकी हिपोक्रेसी की कोई सीमा नहीं।” पप्पू यादव का ये बयान सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है और इस पर लगातार बहस छिड़ी हुई है।

मनोज झा ने भी दिया बड़ा बयान

सिर्फ पप्पू यादव ही नहीं, बल्कि आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी इस वीडियो को लेकर एक दिलचस्प अंदाज़ में अपनी बात रखी है। उन्होंने इस घटना को ‘कूटनीति का कैरेमल युग’ नाम दिया है। मनोज झा का कहना है कि एक समय था जब ‘मेलोडी टॉफी’ महज बच्चों की जेबों, किराने की दुकानों और छुट्टे पैसे की संस्कृति का हिस्सा हुआ करती थी, लेकिन अब वही टॉफी वैश्विक कूटनीति की नई दूत बन चुकी है।

मनोज झा ने आगे कहा कि एक दौर था जब देशों के आपसी रिश्ते बड़ी-बड़ी संधियों, रणनीतिक वार्ताओं और गोपनीय नोट्स के ज़रिए तय होते थे। लेकिन अब वही काम सेल्फी, हैशटैग और टॉफी के पैकेट बड़ी दक्षता के साथ निभा रहे हैं। उन्होंने मौजूदा स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब कूटनीति की सफलता इस बात पर कम निर्भर करती है कि बैठक में असल में क्या तय हुआ, और इस पर अधिक कि कैमरे में क्या कैद हुआ और सोशल मीडिया पर कितना वायरल हुआ।

आरजेडी सांसद ने अपने पोस्ट में ये भी कहा कि ये संभव है कि आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में ‘रणनीतिक टॉफी विनिमय’ को भी औपचारिक मान्यता मिल जाए। उनका तर्क है कि आखिर लोकतंत्र में प्रतीकों का महत्व बढ़ता ही है, और हमारे आज के समय में वही प्रतीक सबसे सफल है जिसे इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सबसे अधिक साझा किया जा सके। इस तरह, पीएम मोदी और मेलोनी की ये ‘मेलोडी टॉफी’ सिर्फ एक मीठा तोहफ़ा नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के दौर में कूटनीति के बदलते स्वरूप का एक बड़ा प्रतीक बन गई है।

Ankita Chourdia
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