हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों स्वच्छता के गंभीर संकट से जूझ रही है। दरअसल बीते छह दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर में कूड़े का अंबार लग गया है, जिसके बाद नगर निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 40 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। शिमला में छह दिनों से लगातार सफाई कर्मचारी काम पर नहीं लौटे थे, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर निगम कमिश्नर ने यह सख्त कदम उठाया है, क्योंकि डीसी शिमला द्वारा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) पहले ही लागू किया जा चुका है। इस अधिनियम के तहत कर्मचारियों का हड़ताल पर जाना गैरकानूनी माना जाता है।
दरअसल राजधानी शिमला का 32 किलोमीटर का विशाल रेडियस इस समय जगह-जगह कूड़े के ढेरों से भरा हुआ है। बीते छह दिनों से घरों से कूड़ा उठाने का काम (डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन) पूरी तरह ठप पड़ा है, जिसने न केवल स्थानीय शहरवासियों को बल्कि शिमला घूमने आए पर्यटकों को भी भारी परेशानी में डाल दिया है। इन कूड़े के ढेरों पर आवारा कुत्ते और बंदरों ने अपना आतंक मचा रखा है, जिससे लोगों का इन इलाकों से गुजरना-फिरना तक मुश्किल हो गया है। शहर की यह स्थिति स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
जानिए क्या थी कर्मचारियों की मांग?
दरअसल, बीते मंगलवार को इन आंदोलनरत कर्मचारियों की शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में सशर्त हड़ताल वापस लेने पर सहमति बनी थी। कर्मचारियों ने स्पष्ट शर्त रखी थी कि उन्हें 10 फीसदी मानदेय बढ़ौतरी की अपनी मांग के संबंध में लिखित आश्वासन दिया जाए, जिसके बाद वे तुरंत काम पर लौट आएंगे। हालांकि, दुर्भाग्यवश, आज इन कर्मचारियों को लिखित में कोई आश्वासन नहीं दिया जा सका, जिसके परिणामस्वरूप हड़ताल जारी रही और प्रशासन को यह कठोर निर्णय लेना पड़ा।
मानदेय जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं: कर्मचारी
सफाई कर्मचारी मूल रूप से अपनी सालाना 10 फीसदी मानदेय बढ़ौतरी को रोके जाने के विरोध में हड़ताल पर उतरे हैं। शिमला शहर की सफाई का महत्वपूर्ण जिम्मा संभालने वाले 800 से अधिक कर्मचारी लंबे समय से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें मिलने वाला मानदेय जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है और 10 फीसदी की बढ़ौतरी उनके लिए बेहद आवश्यक है।
मेयर के साथ हुई थी आज बैठक
कर्मचारियों की मांगों को लेकर सीटू नेता विजेंद्र मेहरा ने नगर निगम प्रशासन और मेयर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मेहरा ने कहा कि मेयर ने आज बैठक बुलाई थी और दोपहर दो बजे तक का समय दिया गया था, लेकिन शाम पांच बजे तक भी कर्मचारियों को मीटिंग के लिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने निगम के इस रवैये को बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इसे देखते हुए कर्मचारी कल भी अपनी हड़ताल जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस हड़ताल को अब विभिन्न संगठनों और यूनियनों का व्यापक समर्थन मिलना शुरू हो गया है। सीटू नेता विजेंद्र मेहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि सैहब कर्मचारियों की इस हड़ताल में अब माकपा, होटल यूनियन, रेहड़ी फड़ी तहबाजारी, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, आईजीएमसी, केएनएच, चम्याना, मेंटल अस्पताल, विशाल मेगामार्ट, धोबी यूनियन, कालीबाड़ी मंदिर, मिड डे मील, आंगनबाड़ी, भवन एवं सड़क निर्माण यूनियन, एचपीएमआरए, एसएफआई, डीवाईएफआई, हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, शिमला नागरिक सभा, पेंशनर एसोसिएशन और दलित शोषण मुक्ति मंच जैसे कई महत्वपूर्ण संगठनों का भी समर्थन मिला है।






