हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी है। दरअसल राज्य में नए मुख्य सचिव (Chief Secretary) की तलाश तेज़ हो गई है, क्योंकि वर्तमान कार्यवाहक मुख्य सचिव संजय गुप्ता 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वहीं इस महत्वपूर्ण पद के लिए वरिष्ठता क्रम में कई नामों पर विचार-विमर्श चल रहा है, लेकिन 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) कमलेश कुमार पंत को इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है।
दरअसल केके पंत वर्तमान में वन, गृह, राजस्व और सतर्कता जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं। उनकी कार्यशैली और विभिन्न विभागों में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें इस शीर्ष पद के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। उनकी वरिष्ठता और महत्वपूर्ण विभागों में उनकी पकड़ उन्हें इस पद के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प बनाती है।
केके पंत सबसे ऊपर
वरिष्ठता क्रम में केके पंत सबसे ऊपर हैं। उनके बाद, 1994 बैच की आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे नंबर पर 1994 बैच के आईएएस अधिकारी एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा का नाम आता है। चौथे स्थान पर 1995 बैच के भरत हरबंसलाल खेड़ा और पांचवें स्थान पर 1995 बैच के आईएएस अधिकारी एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव रावथेर दाऊद नज़ीम हैं। ये सभी अधिकारी राज्य प्रशासन में अपनी-अपनी भूमिकाएं निभा रहे हैं।
दूसरे नंबर पर मौजूद अनुराधा ठाकुर
यदि वरिष्ठता को ही प्राथमिकता दी जाती है, तो केके पंत का मुख्य सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि वरिष्ठता क्रम में दूसरे नंबर पर मौजूद अनुराधा ठाकुर वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में कार्यरत हैं और उनकी राज्य में वापसी की संभावनाएं न के बराबर हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण उनका नाम इस दौड़ से लगभग बाहर हो चुका है।
ओंकार शर्मा का मुख्य सचिव बनना मुश्किल
तीसरे नंबर के अधिकारी ओंकार शर्मा के मुख्य सचिव बनने की संभावनाएं कुछ कम आंकी जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके संबंध राज्य सरकार के साथ बहुत मधुर नहीं रहे हैं। पिछले वर्ष, सरकार ने उन्हें मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत के मामले की जांच का जिम्मा सौंपा था। उनकी रिपोर्ट में सरकार की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाए गए थे, जिसके चलते उच्च न्यायालय ने भी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। इन परिस्थितियों के कारण ओंकार शर्मा की दावेदारी कमजोर पड़ती दिख रही है।
वरिष्ठता क्रम में चौथे नंबर पर आने वाले भरत हरबंसलाल खेड़ा भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में हैं। वहीं, पांचवें नंबर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रावथेर दाऊद नज़ीम भी केंद्र सरकार में अपनी नियुक्ति की तैयारी में हैं। उन्हें केंद्र सरकार से दिल्ली जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी मिल चुका है और अब वे अपनी केंद्रीय नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इन सभी कारणों से कमलेश कुमार पंत को ही अगले मुख्य सचिव पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार देवेश कुमार को सौंपा जा सकता है
इस बीच, एक और चर्चा यह भी है कि यदि राज्य सरकार किसी नियमित मुख्य सचिव की नियुक्ति नहीं करती है, तो 1998 बैच के आईएएस अधिकारी एवं प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार को मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा जा सकता है। हालांकि, यदि देवेश कुमार को यह जिम्मेदारी दी जाती है, तो राज्य में उनसे वरिष्ठ तीन आईएएस अधिकारियों को सुपरसीड करना पड़ेगा, जो एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय होगा और संभवतः कुछ विवादों को जन्म दे सकता है।
वर्तमान कार्यवाहक मुख्य सचिव संजय गुप्ता को छह माह का सेवा विस्तार दिए जाने की भी अटकलें हैं। हालांकि, इसकी संभावनाएं बहुत कम मानी जा रही हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि वे नियमित मुख्य सचिव नहीं हैं, बल्कि उन्हें यह अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। इसके अतिरिक्त, सोलन के चेस्टर हिल घोटाले में उनकी कथित भूमिका भी उनके सेवा विस्तार में एक बाधा के रूप में देखी जा रही है। ऐसे में, हिमाचल प्रदेश में नए प्रशासनिक मुखिया की नियुक्ति जल्द ही होने की उम्मीद है, और सबकी निगाहें कमलेश कुमार पंत पर टिकी हुई हैं।






