नई दिल्ली: राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पार्टी ने चुनाव के दौरान कथित तौर पर हुई धांधली और अवैध प्रक्रियाओं को आधार बनाकर एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें चुनाव परिणामों को अमान्य घोषित कर नए सिरे से मतदान कराने की मांग की गई है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। याचिका में मुख्य रूप से दो बड़े आरोप लगाए गए हैं, जिनके कारण चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
आचार संहिता में पैसे बांटने का आरोप
जन सुराज पार्टी ने अपनी याचिका में कहा है कि चुनाव के दौरान जब आदर्श आचार संहिता लागू थी, तब ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत महिलाओं को सीधे 10-10 हजार रुपये की राशि हस्तांतरित की गई। याचिका के अनुसार, यह कदम मतदाताओं को सीधे तौर पर प्रभावित करने की कोशिश थी।
पार्टी का तर्क है कि चुनाव के समय नए लाभार्थियों को जोड़ना और पैसे जारी करना अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 सहित कई संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। याचिका में दावा किया गया है कि इस योजना से लगभग 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को मौद्रिक लाभ मिला, जिससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता था।
मतदान केंद्रों पर जीविका समूहों की तैनाती पर सवाल
याचिका में दूसरा बड़ा मुद्दा मतदान केंद्रों पर जीविका स्वयं सहायता समूहों की लगभग 1.8 लाख महिलाओं की तैनाती को लेकर उठाया गया है। जन सुराज ने दलील दी है कि उनकी उपस्थिति गैरकानूनी थी और इससे चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और अखंडता कमजोर हुई।
पार्टी ने इस कृत्य को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत एक भ्रष्ट आचरण बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में जन सुराज ने अदालत से चुनाव आयोग को यह निर्देश देने का आग्रह किया है कि इन गंभीर अनियमितताओं के मद्देनजर चुनाव परिणामों को रद्द कर दिया जाए।





