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सरकारी सुरक्षा लौटाने के बाद राबड़ी देवी के आवास पर दिखा अनोखा नजारा, हाथों में लाठी लेकर कार्यकर्ता कर रहे हैं पहरेदारी

Written by:Diksha Bhanupriy
Last Updated:
राबड़ी देवी, लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने सरकारी सुरक्षा वापस लौटा दी है। उनके इस फैसले के बाद एक अलग ही नजारा देखने को मिला। राजद के नेता और कार्यकर्ता उनके घरों के बाहर हाथों में लाठियां लेकर पहरेदारी करते दिखाई दिए।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सहित नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकारी सुरक्षा वापस लौटा दी है। नेताओं के सुरक्षा लौटाए जाने के फैसले से बिहार की राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा हो गया है।

बता दें कि यह फैसला सुनाते हुए राजद ने इसे सम्मान और राजनीतिक प्रतिरोध का प्रतीक बताया है। वही सत्ता पक्ष का कहना है कि यह सहानुभूति की रणनीति है जिसका पार्टी इस्तेमाल कर रही है। बता दें कि जैसे ही राबड़ी देवी के आवास से सुरक्षाकर्मी हटाए गए उसके बाद यहां अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है।

राबड़ी देवी के घर के बाहर का नजारा

राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास से सुरक्षाकर्मी हटाए जाने के बाद राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव खुद कुर्सी लगाकर बैठ गए। इतना ही नहीं कहीं कार्यकर्ता भी है जो यहां सुरक्षा की दृष्टि से खड़े हुए दिखाई दिए। गेट पर एक कार्यकर्ता लाठी लेकर पहरा दे रहा था। राजद के नेताओं का कहना है कि अब पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक ही लालू परिवार का सुरक्षा कवच बनकर काम करेंगे।

सरकार पर साधा निशाना

इस मामले में शक्ति सिंह यादव को सरकार पर निशाना साधते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी ने सुरक्षा लौटने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। उनके अनुसार राज्य सरकार लगातार लालू के परिवार को कभी सुरक्षा तो कभी आवास के मुद्दे पर अपमानित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राजद कार्यकर्ता इस साजिश का पर्दाफाश करेंगे और लालू प्रसाद की विचारधारा से जुड़े लोग सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करवाएंगे। पार्टी का ये कदम विपक्षी एकजुटता से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इस पर कांग्रेस से प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री को जेड प्लस सुरक्षा मिली है तो विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कमी क्यों की गई है।

लौटा देते बंगला और सैलरी

इस मामले को कांग्रेस ने राजनीतिक भेदभाव बताया है। हालांकि सत्ता पक्ष में इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण का कहना है की सुरक्षा एजेंसियां जो आंकलन कर रही हैं उसी के आधार पर सभी को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। वह यह कहते हैं नजर आए की सुरक्षा को राजनीति का रंग देना उचित नहीं है। वहीं जदयू को भी राजद पर पलटवार करते हुए देखा गया। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने यह कहा कि यदि सरकार से इतनी नाराजगी है तो केवल सुरक्षा ही क्यों सरकारी बंगला और अन्य सुविधा भी लौटा देनी चाहिए। उन्होंने इस बात का आरोप लगाया की सुरक्षा व्यवस्था पर राजनीति की जा रही है जबकि सुरक्षा कर में अपना दायित्व निभा रहे थे।

बढ़ी सियासी गर्मी

बता दें कि बंगला खाली करने का नोटिस और सुरक्षा श्रेणी में बदलाव के बाद शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है। राजद ने इसे जनता के बीच सुरक्षा का मुद्दा बनाकर ले जाने की कोशिश की है। वहीं एनडीए दल इसे राजनीतिक नाटक बता रहा है। अब आने वाले दिनों में यह मामला राजनीति में कितना बड़ा मुद्दा बनता है, ये तो समय ही बताएगा।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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