बिहार की राजनीतिक सरगर्मियां इन दिनों विधान परिषद चुनाव को लेकर तेज हो गई हैं। राज्य की दो प्रमुख पार्टियां, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने-अपने उम्मीदवारों की सूचियां जारी कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इन सूचियों में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं जिन्होंने राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है, खासकर भोजपुरी फिल्म जगत के चमकते सितारे पवन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का विधान परिषद में प्रवेश।
भाजपा ने अपनी ओर से चार प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगाई है। इनमें भोजपुरी सिनेमा के जाने-माने चेहरा पवन सिंह के साथ-साथ संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित जैसे अनुभवी और नए चेहरे शामिल हैं। पवन सिंह का नाम इस सूची में आना अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यह वही पवन सिंह हैं जिनके राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर इस साल खूब अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन तब उन्हें मौका नहीं मिल पाया था। अब पार्टी ने उन्हें विधान परिषद के माध्यम से सदन में लाने का निर्णय लिया है। उनका राजनीतिक सफर भी कम नाटकीय नहीं रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने काराकाट सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरकर सबको चौंका दिया था, हालांकि उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली।
JDU ने निशांत कुमार समेत इन नेताओं को दिया टिकट
दूसरी ओर, जनता दल यूनाइटेड ने भी चार उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का है। निशांत के अलावा, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को भी जदयू ने अपना उम्मीदवार बनाया है। निशांत कुमार का विधान परिषद में आना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में 18 जून को होने वाले एमएलसी चुनाव के बाद उनके सदन में पहुंचने की संभावनाएं प्रबल हैं। गौरतलब है कि निशांत कुमार हाल ही में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बने हैं, लेकिन वह अभी तक किसी भी सदन विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। पार्टी का यह कदम उन्हें विधायी प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके साथ ही, जदयू ने ललन प्रसाद को उस सीट से उम्मीदवार बनाया है जो नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद खाली हुई थी। नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के उपरांत विधान परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिससे यह सीट रिक्त हो गई थी।
भाजपा ने पवन सिंह को आसनसोल से दिया था लोकसभा का टिकट
पवन सिंह की बात करें तो, भाजपा ने उन पर एक बार फिर बड़ा दांव खेला है। उनका चुनावी इतिहास देखें तो, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से टिकट दिया था। लेकिन उन्होंने अप्रत्याशित रूप से उस सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था, जिससे राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी। इस इनकार के बाद, 9 मई को उन्होंने बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था। उस समय एनडीए गठबंधन ने इस सीट से राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, पवन सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने से एक ऐसा ‘पवन फैक्टर’ सक्रिय हो गया था, जिसने उपेंद्र कुशवाहा की हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब विधान परिषद के रास्ते उन्हें सदन में लाने का निर्णय भाजपा की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह कदम न केवल पार्टी के भीतर उनके कद को बढ़ाता है, बल्कि भोजपुरी भाषी मतदाताओं के बीच भी एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास है।





