तेजस्वी यादव ने केरल में अपने संबोधन के दौरान बिहार की तुलना केरल से की। दरअसल उन्होंने कहा कि वे बिहार से आते हैं, जो देश के गरीब राज्यों में शामिल है, जबकि केरल विकास के मामले में एक अच्छा उदाहरण माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार को भी केरल की तरह आगे बढ़ना चाहिए और वहां के लोगों से सीखने की जरूरत है।
वहीं तेजस्वी यादव का यह बयान सामने आते ही बिहार की राजनीति में विवाद शुरू हो गया। सत्ताधारी दलों के नेताओं ने इसे राज्य की छवि खराब करने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि इस तरह के बयान से बिहार की प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है।
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AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने तेजस्वी यादव का समर्थन किया
हालांकि इस विवाद के बीच AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने तेजस्वी यादव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसमें आपत्ति की कोई बात नहीं है। उनके मुताबिक बिहार गरीब है, यह बात सभी जानते हैं और इसे छिपाने की जरूरत नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव खुद उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनके परिवार को भी लंबे समय तक शासन का अनुभव रहा है।
अख्तरुल ईमान ने यह भी याद दिलाया कि बिहार के गरीब होने का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। राज्य के कई राजनीतिक दल खुद विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र से विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि जब सभी दल इस मांग का समर्थन करते रहे हैं, तो अब तेजस्वी यादव के बयान पर इतना विवाद क्यों किया जा रहा है।
एनडीए के नेताओं ने इस बयान की कड़ी आलोचना की
दूसरी ओर एनडीए के नेताओं ने इस बयान की कड़ी आलोचना की। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार को गरीब बताना राज्य का अपमान है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और विकास के प्रयासों पर भी असर डाल सकते हैं।
बिहार में ‘गरीब राज्य’ या ‘पिछड़े राज्य’ की बहस लंबे समय से राजनीति का हिस्सा रही है। एक तरफ नेता राज्य के विकास की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ विशेष राज्य के दर्जे की मांग भी करते रहे हैं। तेजस्वी यादव का बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनने लगा है और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो रही है।
फिलहाल इस मुद्दे पर सियासत गर्म बनी हुई है। सत्ता पक्ष इसे बिहार के खिलाफ बयान बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राज्य की वास्तविक स्थिति बताने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में यह बहस बिहार की राजनीति में और तेज हो सकती है।