सिंगरौली जिले की सरई तहसील में एक सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र कोयले की धूल से बुरी तरह प्रभावित हैं। दरअसल हालात ऐसे हैं कि 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद एक भी बच्चा स्कूल नहीं पहुंच रहा है। अभिभावक बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित हैं और उन्हें इस माहौल में स्कूल भेजने से मना कर रहे हैं।
दरअसल सरई तहसील के गजराबहरा गांव के परतहान टोला में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-3 इन दिनों कोयले की काली धूल से घिरे हुए हैं। स्कूल के पास ही बैरासिटी कोल यार्ड होने के कारण वहां से उड़ने वाली बारीक धूल पूरे परिसर में फैल रही है। यही वजह है कि स्कूल खुलने के बाद भी बच्चे पढ़ने नहीं आ रहे हैं।
अभिभावकों की चिंता बढ़ी
वहीं स्कूल परिसर की हालत ऐसी है कि कक्षाओं की बेंच, दीवारें, फर्श, बच्चों के खेलने का मैदान और यहां तक कि भोजन कक्ष तक पर कोयले की धूल की परत जम जाती है। बच्चों के बैग और किताबों तक पर काली धूल बैठ जाती है। सुबह के समय भी आसपास धूल का गुबार और उसकी तेज गंध महसूस होती है। इस स्थिति से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को ऐसे माहौल में स्कूल नहीं भेज सकते, जहां उनकी सेहत को खतरा हो। उनका मानना है कि पढ़ाई बाद में भी हो सकती है, लेकिन अगर बच्चों की सेहत खराब हो गई तो उसकी भरपाई मुश्किल होगी।
कोयले की धूल का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा
कोयले की धूल का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। कई बच्चों में सांस लेने में परेशानी, त्वचा पर एलर्जी, आंखों में जलन और सूखी खांसी जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसी धूल में रहने से फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कोल यार्ड में धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित पानी का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है और न ही उसे पूरी तरह ढंका गया है।
लोगों का कहना है कि प्रशासन चाहे तो स्कूल और आंगनबाड़ी को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर सकता है, लेकिन इस दिशा में भी अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ और कोयले की धूल पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत और भविष्य के साथ समझौता किसी भी कीमत पर नहीं किया जाएगा।






