भाजपा में लौटे ‘बाबाजी’ बोले, ‘मैं कांग्रेस में नहीं जाता, तो सिंधिया BJP में नहीं आते’

भाजपा में लौटे ‘बाबाजी’ बोले, ‘मैं कांग्रेस में नहीं जाता, तो सिंधिया BJP में नहीं आते’

दमोह। गणेश अग्रवाल| विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर भाजपा के खिलाफ बागी होकर निर्दलीय खड़े होकर चुनौती देने वाले पूर्व मंत्री व बुंदेलखंड के कद्दावर नेता डॉ रामकृष्ण कुसमरिया ने अब बड़ा दावा किया है| कांग्रेस छोड़ भाजपा में लौटे ‘बाबाजी’ ने दावा देश के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर किया है| बाबा का दावा है कि यदि वे कांग्रेस में नहीं जाते तो ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में नहीं आते| बाबा का दावा है कि उनके कारण ही ज्योतिरादित्य सिंधिया भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए| यदि वे वहां नहीं जाते तो वह यहां नहीं आते|

भोपाल में एक समारोह के दौरान भारतीय जनता पार्टी में फिर से वापस लौट आने के बाद बाबा जी अपने क्षेत्र हटा लौटे| जहां पर उन्होंने एक आयोजन के दौरान सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि उनके कारण से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया भारतीय जनता पार्टी में आए हैं| यदि वे कांग्रेस में नहीं जाते तो इतना बड़ा नेता भाजपा के साथ नहीं होता|

उन्होंने कहा कि पहले भाजपा के दरवाजे बंद थे जो उनके कांग्रेस में जाने के बाद खुल गए हैं| बाबा ने कहा कि उनका कांग्रेस में जाना घाटे का सौदा साबित नहीं हुआ| वे कांग्रेस में गए और वहां से कुछ लेकर के ही आए हैं|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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