ग्वालियर-भोपाल के बाद अब इंदौर में भी घरों में पढ़ी जायेगी नमाज़

ग्वालियर-भोपाल के बाद अब इंदौर में भी घरों में पढ़ी जायेगी नमाज़

इंदौर।आकाश धौलपुरे।

मुफ्ती ए मालवा मौलाना नूर उल हक, शहर क़ाज़ी डॉक्टर मोहम्मद इशरत अली, मौलाना अनवार अहमद कादरी, मौलाना अहमद मियां, मुफ्ती साबिर अली और मौलाना आरिफ बरकाती ने बताया कि इस वक़्त पूरी दुनिया बड़ी मुसीबत यानी कोरोना वायरस में मुब्तला है। जिसे वतन-ए-अजीत हिंदुस्तान भी महफूज नहीं है।

लिहाजा तीन हफ्तों के सख्त लॉक डाउन को देखते हुए यह तय किया गया है कि शहर की तमाम मस्जिदों में इमाम के साथ चंद लोग ही नमाज पढ़े। बाकी सभी लोग अपने घरों पर ही नमाज पढ़े। इस बीमारी से बचने का एक ही तरीका है कि हम सोशल डिस्टेंस बनाकर रखे रहें।

तीन हफ्ते के लायक डाउन को देखते हुए सुन्नी अईम्मा कौंसिल इंदौर अहले इंदौर के लिए भी यही हुक्म जारी कर रही है लिहाजा अब मस्जिद में इमाम मोअज्जिन के साथ चंद लोग शरीके जमाअत रहे बाक़ी घरों पर ही नमाज़ अदा करे। इतना ही नही कौंसिल द्वारा तमाम अइम्मा ए किराम अपनी अपनी मस्जिद में ऐलान फरमा दे ये ताकीद भी किया गया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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