BJP विधायक के बिगड़े बोल, मजदूर से कहा- बाहर क्यों गए, म.प्र में नहीं थी नौकरी

BJP विधायक के बिगड़े बोल, मजदूर से कहा- बाहर क्यों गए, म.प्र में नहीं थी नौकरी

जबलपुर।

एक तरफ जहाँ देशव्यापी लॉकडाउन(lockdown) के बीच मजदूरों को कई तरह के दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लाखों प्रवासी मजदूर अलग-अलग राज्यों में फंसे हुए हैं। काम न मिलने की वजह से प्रवासी मजदूर किसी तरह अपने गांव लौटना चाहते हैं। जिसको लेकर मजदूर स्थानीय नेताओं से मदद कीगुहार लगा रहे हैं। जहाँ राज्य सरकार भी विधायकों(mlas) से मजदूरों की मदद के लिए आगे आने की अपील कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के जबलपुर(jabalpur) से एक ताजा मामला सामने आया है।

दरअसल जबलपुर जिले के पनागर विधायक सुशील इंदु तिवारी (Sushil Indu Tiwari) का एक ऑडियो(audio) सोशल मीडिया(social media) पर तेजी से वायरल(viral) हो रहा है। जहाँ मजदूर इंदु तिवारी से उन्हें घर वापस बुलाये जाने की गुहार लगा रहे हैं। वहीँ पनागर विद्यायक तिवारी मजदूरों से बेहद ही आपत्तिजनक शब्दों में बात करते सुने जा रहे हैं। वायरल ऑडियो में परिजन के आग्रह पर विधायक तिवारी कह रहे है कि उन्हें असम में कोई नहीं जानता है और वो मजदूरों के परिजन को वापस नहीं ला सकते।उन्होंने कहा कि सांसद राकेश सिंह से संपर्क करो वे ही तुम्हारी मदद कर सकते हैं।

वहीँ ऑडियो में सुशील तिवारी मजदूरों से ये भी कह रहे हैं कि तुम्हारे परिजन को मजदूरी के लिए असम जाने की जरूरत क्या थी? क्या मध्य प्रदेश में रोजगार नहीं मिल रहा है? वहीँ मजदूरों की मदद करने से इंकार करते हुए विधायक उनको सांसद से संपर्क करने का कह रहे हैं। वहीँ दूसरी तरफ विधायक मजदूरों की बेबसी सुनने के बजाए उल्टा उसी को खरी-खोटी सुना रहे हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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