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मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के टाइटल पर भड़कीं मायावती, केंद्र सरकार से बैन और लखनऊ में FIR की मांग की

Written by:Ankita Chourdia
Published:
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडित' के शीर्षक पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताते हुए केंद्र सरकार से इस प्रोजेक्ट पर तत्काल रोक लगाने और लखनऊ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के टाइटल पर भड़कीं मायावती, केंद्र सरकार से बैन और लखनऊ में FIR की मांग की

नई दिल्ली: अभिनेता मनोज बाजपेयी की आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ अपने टीज़र के रिलीज़ होते ही एक बड़े विवाद में घिर गई है। अब इस विवाद में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती भी शामिल हो गई हैं। उन्होंने फिल्म के शीर्षक को लेकर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है और इसे पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।

मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘पंडित’ जैसे एक सम्मानजनक शब्द को ‘घूसखोर’ जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ना अत्यंत आपत्तिजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की सामग्री सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का काम कर सकती है।

सरकार से तत्काल प्रतिबंध की मांग

बसपा प्रमुख ने इस मामले में केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस फिल्म/वेब प्रोजेक्ट पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए ताकि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों। इसके अलावा, उन्होंने लखनऊ पुलिस से इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का भी आग्रह किया है।

“किसी फिल्म/वेब प्रोजेक्ट में ‘पंडित’ जैसे सम्मानजनक शब्द को घूसखोरी से जोड़ना पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।” — मायावती, बसपा प्रमुख

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी भी जाति या समुदाय के प्रति अपमानजनक कंटेंट का पुरजोर विरोध करती है और इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद का केंद्र ‘घूसखोर पंडित’ नामक एक प्रोजेक्ट है, जिसमें अभिनेता मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं। टीज़र के अनुसार, वह दिल्ली के एक सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित का किरदार निभा रहे हैं, जिन्हें लोग ‘पंडित’ के नाम से जानते हैं। फिल्म में उनके किरदार को एक बदनाम और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में चित्रित किया गया है।

इस शीर्षक के सामने आने के बाद से ही देश के कई हिस्सों में विरोध शुरू हो गया है। मुंबई के वकील आशुतोष दुबे ने फिल्म निर्माताओं और ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix को एक कानूनी नोटिस भी भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि ‘पंडित’ एक प्रतिष्ठित संबोधन है और इसे भ्रष्टाचार से जोड़ना अस्वीकार्य है। वकील ने फिल्म का नाम बदलने की मांग की है। हालांकि, इस पूरे विवाद पर अब तक फिल्म के निर्माताओं या नेटफ्लिक्स की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।