Pariksha Pe Charcha 2026: बोर्ड परीक्षाओं से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने, उन्हें प्रोत्साहित करने और उनके अन्दर परीक्षा को लेकर भय या घबराहट को दूर करने के लिए उनसे चर्चा करते हैं , इस साल इस कार्यक्रम का नौवा साल है, प्रधानमंत्री ने आज बच्चों को ना सिर्फ सफलता के मन्त्र दिए बल्कि उनकी जिज्ञासाओं को शांत भी किया, पीएम ने बच्चों के सवालों का जवाब बहुत सहज भाव से दिया, उन्होंने टीचर्स और पेरेंट्स को भी कुछ सुझाव दिए।
प्रधानमंत्री ने कहा जब मैंने परीक्षा पे चर्चा शुरू किया, तो एक पैटर्न था। अब धीरे-धीरे में उसे बदलता जा रहा हूं, इस बार मैंने अलग-अलग राज्यों में भी किया। मैंने भी अपनी पैटर्न बदली, लेकिन मूल पैटर्न को नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा मैं प्रधानमंत्री बन चुका हूँ फिर भी, लोग मुझे अलग-अलग तरीके से काम करने की सलाह देते हैं। लेकिन हर किसी का अपना तरीका होता है। कुछ लोग सुबह बेहतर पढ़ाई करते हैं, कुछ रात में जो भी आपको सही लगे, उसी पर विश्वास करें। लेकिन सलाह भी लें, और अगर उससे आपको फायदा हो, तो ही उसे अपनी जीवनशैली में शामिल करें। मैंने भी कुछ बदलाव किए हैं, लेकिन अपने मूल तरीके को नहीं छोड़ा।
उन्होंने बच्चों से कहा पढ़ाई, आराम, कौशल और शौक में संतुलन बनाए रखें। यही उन्नति और विकास की कुंजी है। पीएम ने कहा दो प्रकार के कौशल भी होते हैं, जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल। उसमें भी कोई मुझसे पूछेगा कि किस पर ध्यान देना चाहिए, मैं कहूंगा कि दोनों पर ध्यान देना चाहिए। बिना अध्ययन और ऑब्जरवेशन किए और बिना ज्ञान प्रयुक्त किए कोई भी स्किल आ सकता है क्या? स्किल की शुरुआत तो ज्ञान से ही होती है, उसका महत्व कम नहीं है। मेरा मानना है कि दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। हर चीज में संतुलन होना चाहिए। एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे ही गिरोगे।
उन्होंने कहा टीचर का प्रयास रहना चाहिए कि विद्यार्थी की स्पीड इतनी है, मेरी स्पीड उससे एक कदम ज्यादा रहनी चाहिए। पीएम ने कहा हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जो पहुंच में हो, लेकिन पकड़ में न हो। मन को जोतो, फिर मन को जोड़ो और फिर आपको पढ़ाई के जो विषय रखने हों, रखो। फिर आप विद्यार्थी को हमेशा सफल पाएंगे।
जो बीत गया है उसकी गिनती मत करो
प्रधानमंत्री ने एक उदाहरण देते हुए कहा- अभी मेरे जन्मदिन पर 17 सितंबर को एक नेता ने फोन किया और कहा कि आपके 75 साल हो गए, तो मैंने उसे कहा कि 25 अभी बाकी हैं। मैं बीते हुए को नहीं, बल्कि बचे हुए को गिनता हूं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा इसीलिए मैं आपसे कहता हूँ जो बीत गया है उसकी गिनती मत करो समय बर्बाद मत करो जो बचा है इसके बारे में सोचो उसे जीने के बारे में सोचो ।
गेमिंग एक कौशल है इसमें गति भी शामिल है
प्रधानमंत्री ने कहा शिक्षा बोझ नहीं होनी चाहिए। हमें इसमें पूरी तरह से शामिल होना चाहिए। आधे-अधूरे मन से की गई शिक्षा जीवन को सफल नहीं बनाती। इसलिए हमें केवल अंकों पर ही नहीं, बल्कि जीवन के सुधार पर ध्यान देना चाहिए। यह कक्षाओं और परीक्षाओं से परे है। भारत में इंटरनेट सस्ता है, इसलिए समय बर्बाद न करें। मैंने सट्टेबाजी के खिलाफ कानून बनाया है। हम ऐसा होने नहीं देंगे। लेकिन गेमिंग एक कौशल है। इसमें गति भी शामिल है, इसलिए यह विकास के लिए अच्छा है। लेकिन बेहतर गुणवत्ता वाले गेम चुनकर अपनी विशेषज्ञता खोजने का प्रयास करें।
जीवन बनता है, जिन्दगी जीने के तरीके से
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए पीएम ने कहा हमारे देश में बोर्ड के एग्जाम में नंबर लाने वाले बच्चे छोटे-छोटे गांव से हैं, पहले बड़े परिवार और बड़ी स्कूल के बच्चे ही नंबर लाते थे। अभी कुछ दिन पहले में ब्लाइंड क्रिकेट टीम की बच्चियों से मिला, वो जीतकर आई थीं, जब मैंने उनको सुना तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। उनके पास घर नहीं है, और वो ब्लाइंड हैं, खेलना सीखा और दिव्यांग होने के बावजूद भी वो यहां तक पहुंची। हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिये कि comfort zone ही जीवन बनाता है, जीवन बनता है, जिन्दगी जीने के तरीके से।





