कारोबारी ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में पुलिस पर तीन लाख की फिरौती का लगाया आरोप

कारोबारी ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में पुलिस पर तीन लाख की फिरौती का लगाया आरोप

धार।मो. अंसार।

धामनोद नगर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया। जिसमें एक ढाबा कारोबारी ने आत्महत्या कर छोड़े सुसाइड नोट में पुलिस पर तीन लाख रुपए मांगने का आरोप लगाया। पूरा मामला अवैध शराब से जुड़ा है। जहां पुलिस ने शुक्रवार दोपहर में मुखबिर की सूचना पर एक कार क्रमांक एमपी 09 डब्लू डी 5261 से 5 पेटी अवैध शराब जप्त की। साथ ही दो युवको अतुल पिता घिसालाल जायसवाल एवं रोहित पिता मोहन सिंह मोरे के खिलाफ आबकारी एक्ट में प्रकरण भी दर्ज किया। बाद में दोनों आरोपियों को छोड़ भी दिया गया। शुक्रवार रात को ही अतुल जयसवाल जो कि ढाबा संचालक भी है ने अपने ढाबे पर फांसी लगा ली।

घटना के बाद मृतक के साथी रोहित मोरे ने बताया कि शराब जप्त करने वाला पुलिस ने उन्हें धामनोद के आगे ले जाकर मामला दबाने के लिए राहुल और अतुल से 3 लाख रुपये मांगे तो अतुल ने अपनी जेब में रखे 20 हजार रुपए तुरंत दे दिए। फिर थाने ले जाकर डेढ़ लाख रुपए मैं फाइनल कर देने की बात हुई। तथा डेढ़ लाख रुपए में मामला निपटा कर बाकी के पैसे लाने को कहा। जिस पर हम लोगों ने 60 हजार रुपए दिए व घर आ गए। शाम को साथ में रहे क्रिकेट भी खेला , वही रात में सोशल मीडिया पर स्टेटस डाल कर अतुल ने फांसी लगा ली। वहीं घटना के बाद परिजनों की मांग पर पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने घटना में सम्मिलित बताएं 3 पुलिसकर्मी बृजभूषण हिरवे , राहुल एवं शैलेंद्र भदौरिया को लाइन अटैच भी कर दिया। वहीं घटना की जानकारी के बाद क्षेत्रीय विधायक पाची लाल मेड़ा भी पहुंच गए एवं परिजनों के साथ स्थानीय लोगों ने मिलकर प्रशासन से जांच की मांग करते हुए आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वही विधायक ने म्रतक की आर्थिक स्थित ठीक न होने पर सहायता देने की बात भी कही।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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