होली पर व्यापारियों का व्यापार कोरोना वायरस ने किया ठप

होली पर व्यापारियों का व्यापार कोरोना वायरस ने किया ठप

संदीप कुमार।जबलपुर

“होली” रंगों का पर्व..इस पर्व में लोग रंगों के साथ खुशियां मानते है पर कोरोना वायरस ने इस बार होली के पर्व को फीका कर दिया है।रंग पिचकारी से सजी दूकाने खाली पड़ी है।ग्राहक दूकान आते तो जरूर है पर कुछ खरीदने से पहले चायना के रंग,गुलाल के बारे में जरूर पूछ परख करते है हालांकि जबलपुर में सभी दूकानों में दूकानदारों ने भी चायना के रंग-गुलाल से तौबा कर ली है।रंग-गुलाल की दूकान लगाकर बैठे दूकानदार हरीश कुमार का कहना है कि कोरोना वायरस ने इस बार होली के व्यापार को पूरी तरह से चौपट कर दिया है।दूकान में ग्राहक आने से कतरा रहे है और जो ग्राहक आते है तो पहले उनके द्वारा यही पूछा जाता है कि ये चायना के रंग गुलाल तो नही है।

लाखो रु का माल लेकर आए पर नही हो रही है बिक्री
दूकानदार राजेश बताते है कि नई-नई वैरायटी के पिचकारी-रंग-गुलाल लाखो रु खर्च कर लेकर आए थे।उम्मीद थी कि त्योहार में बिक्री अच्छी होगी पर कोरोना वायरस ने पूरे व्यापार में पानी फेर दिया।दिन भर में दो-चार ग्राहक ही रंग-गुलाल लेने आ रहे है और जो आ रहे है वो पहले चायना के सामानों के विषय मे पूछते है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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