कैबिनेट मंत्री बोले-ऐसा हुआ तो गहराएगा कमलनाथ सरकार पर संकट

कैबिनेट मंत्री बोले-ऐसा हुआ तो गहराएगा कमलनाथ सरकार पर संकट

गुना।
देर रात उठे तूफान ने कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल गहरा दिए है।तीन विधायक अब भी लापता है, सियासी गलियारों में सरकार के अस्थिर करने की चर्चाएं हो रही है, वही बीजेपी नेताओं ने भी दिल्ली में डेरा डाल दिया है, ऐसे में बीजेपी की तरफ से तख्तापलट की पूरी तैयारी है।इस सारे घटनाक्रम को लेकर बयानबाजी भी जमकर हो रही है। इसी बीच कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन महेंद्र सिंह सिसोदिया ने बड़ा बयान देकर आग में घी डालने का काम कर दिया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कमलनाथ सरकार के श्रम मंत्री महेंद्रसिंह सिसौदिया ने कहा कि सरकार पर असली संकट तब आएगा जब हमारे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपेक्षा या अनादर होगा। उन्होंने कहा कि उस दिन जो काला बादल छाएगा वो क्या कर जाएगा, मैं भी नहीं बता सकता। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार पर फिलहाल कोई संकट नहीं है।

इधर, सियासी तूफान को थामने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई है। मौजूदा हालातों में पूरी कमान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने अपने हाथ में ले ली है।इसके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, गुलामनबी आजाद और कपिल सिब्बल भी इस अभियान को सफल बनाने में जुटे है। इसके साथ ही पीसीसी चीफ के जल्द ऐलान की भी चर्चाएं सरगर्म है।कमलनाथ सरकार लगातार डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है।वही बीजेपी विधायकों को भी तोड़ने की हर संभव कोशिश जारी है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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