साधुओं की हत्या पर भड़के कंप्यूटर बाबा, बोले-UP में रामराज है या रावनराज

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इंदौर।आकाश धोलपुरे।

17 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में दो साधु और एक ड्रायवर की लोगों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस घटना की आग अभी बुझी ही नही थी कि यूपी के बुलंद शहर में 2 साधुओं की धारदार हथियार से हत्या का मामला सामने आया है। सोमवार को उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर के अनूपशहर कोतवाली में दो साधुओं की हत्या कर दी गई है मंदिर परिसर में सो रहे दो साधुओं पर धारदार हथियार से वार किया गया है जिसके बाद उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक पड़ताल में पुलिस को पता चला है कि चिमटा चुराने की बात को लेकर विवाद के क्षेत्र के ही एक व्यक्ति ने हत्या की है । इधर, पहले पालघर तो अब बुलंदशहर में हुई साधुओं की हत्या के बाद इंदौर में संत समाज ने अपना आक्रोश जताया है। षट्दर्शन संत समिति म.प्र में अध्यक्ष महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा ने यूपी में साधुओं की हत्या के मामले की पूरी जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। कंप्यूटर बाबा ने यूपी की योगी सरकार चेतावनी देते हुए कहा कि एक माह के अंदर हत्या के खुलासा और जांच पूरी नही हुई तो मध्यप्रदेश प्रदेश सहित देशभर के हजारों साधु – संत बुलंद शहर में अनशन करेंगे। कंप्यूटर बाबा ने संतो की हत्या पर सवाल खड़े कर कहा की आखिर हमारे साधुओं और संतो ने किसी का क्या बिगड़ा है जो उनको टारगेट किया जा रहा है ? वही यूपी के मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए और कहा कि योगी जी आप उत्तर दें की यूपी में रामराज है या रावणराज ? यूपी की घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग करने वाले कम्प्यूटर बाबा ने कुछ दिन पहले ही पीएम मोदी को पत्र लिखकर सुरक्षा देने की मांग के साथ ही कोरोनाकाल में भोजन और राशन उप्लब्ध कराने की मांग भी उठाई थी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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