MP Politics: भाजपा की राजनैतिक स्थिति की आशंका से उपचुनाव टालने की साज़िश

OBC Reservation

भोपाल।

शिवराज कैबिनेट विस्तार (Shivraj cabinet expansion) के बाद और उपचुनाव (by election) से पहले एमपी(mp) का सियासी पारा हाई है। राजनैतिक पार्टियों के बीच बयानबाजी का दौर तेजी से चल रहा है। मुद्दा कोई भी हो दोनों ही मुख्य दल एक दूसरे की जमकर घेराबंदी कर रहे है।खास करके उन मुद्दों को भुनाया जा रहा है, जिन्हें उपचुनाव के दौरान जनता के बीच लेकर पहुंचना है।अब कांग्रेस के कद्दावर नेता केके मिश्रा(congress leader k.k mishra) ने बीजेपी(bjp) द्वारा साजिश के तहत उपचुनाव टालने की बात कही है।

मिश्रा ने इसको लेकर एक ट्वीट भी किया है। जिसमें मिश्रा ने लिखा है कि ”भाजपा की जर्जर राजनैतिक स्थिति की आशंका से उपचुनाव टालने की साज़िश, CM के कथनानुसार एक्टिव पॉजेटिव रोगी संख्या में प्रदेश दूसरे से 15 वें क्रम पर,रिकवरी रेट 76.9 तो सिर्फ ग्वालियर,मुरैना ही संक्रमित क्यों?मैं तो यहीं हूँ, आंकड़े फर्जी!डर पराजय से,कोरोना से नहीं!”यह पहला मौका नही है जब मिश्रा ने शिवराज सरकार को घेरा हो, इसके पहले भी वो ट्वीटर और अपने तीखें बयानों से महाराज की जमकर घेराबंदी कर चुके है। खास बात ये है कि मिश्रा ग्वालियर के चुनाव प्रभारी भी है।

बता दे कि सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश एक्टिव प्रकरणों के लिहाज से शुरूआत में देश में दूसरे क्रम पर था। सघन प्रयासों से स्थिति में इतना सुधार हुआ है कि मध्य प्रदेश अब 15वें क्रम पर है। प्रदेश का रिकवरी रेट 76.9 प्रतिशत रहा है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews