Video: अब जीतू पटवारी के बिगड़े बोल, मुख्यमंत्री के लिए यह क्या बोल गए

Video: अब जीतू पटवारी के बिगड़े बोल, मुख्यमंत्री के लिए यह क्या बोल गए

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (MadhyaPradesh) में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Byelection) में जुबानी जंग तीखी होती जा रही है| प्रदेश के चुनावी इतिहास में पहली बार शब्दों की मर्यादा इस तरह तारतार होती नजर आ रही है| रोजाना नए नए शब्दों के वाण छोड़े जा रहे हैं| अब पूर्व मंत्री जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने विवादित बयान दिया है| पटवारी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) को पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamalnath) की पेरो की धूल बताया है|

अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहने वाले पूर्व मंत्री जीतू पटवारी अब तक खामोश थी, लेकिन शनिवार को उनके एक बयान से बवाल मच गया है| बीजेपी ने पटवारी के बयान पर नाराजगी जताई है| पूर्व मंत्री जीतू पटवारी मांधाता विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे| इस दौरान उन्होंने कहा सीएम शिवराज सिंह चौहान कमल नाथ के पैरों की धूल भी नहीं है| बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने पटवारी का वीडियो जारी कर कांग्रेस पर हमला बोला है|

बीजेपी नेता रजनीश अग्रवाल ने कहा जीतू पटवारी कमलनाथ के पैरों की धूल CM को बताने की जुर्रत कर रहे हैं। ये प्रदेश की जनता, किसानों, महिलाओं, भांजे भांजियों का अपमान है। किस हैसियत से जीतू पटवारी इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं ​सीएम के लिए। कांग्रेस हार से बौखला गई है, ये लोग मानसिक तौर पर दिवालिया हो गए हैं।

बता दें कि विवादित बयानों का यह पहला मामला नहीं है| इससे पहले कांग्रेस नेता दिनेश गुर्जर ने सीएम शिवराज के लिए भूखे नंगे शब्दों का इस्तेमाल किया था| उन्होंने कहा था कि शिवराज तो भूखे-नंगे घर से पैदा हुए है, हमारे कमलनाथ देश के दूसरे सबसे अमीर उद्योगपति है| इस पर जमकर बवाल भी हुआ| मुख्यमंत्री शिवराज ने इसके जवाब में कहा था कि हां मैं भूखा-नंगा हूं. कमलनाथ उद्योगपति हैं, इसलिए जनता के दर्द को समझता हूँ|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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