Corona crisis: महामारी के बीच आवारा पशुओं का मसीहा बना यह युवक

Corona crisis: महामारी के बीच आवारा पशुओं का मसीहा बना यह युवक

कटनी।वंदना तिवारी।

आज कोरोना महामारी के कारण इंसान ही नहीं जानवर भी परेशान है। ऐसे में पशुओं के मसीहा बनकर सामने आए यह युवक रोजाना 4000 रोटियां आवारा पशुओं में वितरित कर उनकी भूख मिटाते है। कटनी में रहने वाले व्यवसाई सतीश सरावगी के पुत्र पीयूष सरावगी विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक को अपनी प्रेरणा बताते हुए लॉकडाउन के दिन से अपने साथियों के साथ मिलकर कटनी शहर में आवारा पशुओं गायों को जगह-जगह जाकर रोटियां खिलाते हैं एवं कच्ची सब्जी जैसे पालक टमाटर आदि से पशुओं का पेट भरते नजर आते हैं।

प्रतिदिन यह युवक 4000 से 5000 रोटियां जोकी मशीन के द्वारा बनाई जाती हैं। उनको लेकर निकल पड़ते हैं। पशुओं को खिलाने फिर चाहे गाय हो या अन्य जानवर यह उनकी भूख मिटाते हैं। यह समाज में आज बहुत बड़ा उदाहरण छोड़ते नजर आ रहे हैं। जहां लोग इंसानों की मदद करने से कतराते हैं। वहीं पर यह युवा पशुओं के लिए कड़ी धूप में निकल जाते हैं। रोटियां लेकर और ढूंढ ढूंढ कर उन्हें रोटियां खिलाते नजर आते हैं। आज यह पशुओं के मसीहा बने हुए हैं और समाज में बहुत बड़ा उदाहरण है। पीयूष सरावगी ने बताया कि वह अपने मित्र नमन एवं पीसी और अन्य मित्रों की सहायता से यह एक गाड़ी में रोटियां भरकर शहर में जहां पर भी देखते हैं। पशुओं को चाहे वह गाय हो कुत्ता हो या अन्य पशुओं वहीं पर यह रोटी वितरित करके उनकी भूख मिटाते हैं।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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