किन्नर समुदाय में कोरोना की दस्तक, एक की मौत, टोली में दहशत

किन्नर समुदाय में कोरोना की दस्तक, एक की मौत, टोली में दहशत

भोपाल।

कोरोना(corona) संकट तो दूसरा है रोजाना कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ रही है।शनिवार को भोपाल में नए 47 कोरोना के मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही राजधानी में कोरोना महामारी का प्रकोप अब किन्नर समुदाय तक पहुँच चुका है। शहर में पहली किन्नर की मौत हुई है। बुधवारा स्थित कोलीपुरा में किन्नर समुदाय में 40 साल की किन्नर तबीयत खराब होने पर हमीदिया अस्पताल(hamidia hospital) रेफर किया था। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मौत को मिलाकर भोपाल में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है और शहर में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 736 हो गई है।

दरअसल भोपाल में कोरोना वायरस(corona virus) से 40 वर्षीया पहली किन्नर की मौत हो गई है। हमीदिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।जिसके बाद किन्नरों की टोली के 24 लोगों के लिए सैंपल(sample) लिए गए थे। भोपाल के तलैया थाना क्षेत्र के बुधवारा में किन्नरों की टोली रहती है। वही किन्नर की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद किन्नर समाज में दहशत का माहौल है।

बता दें कि इससे पहले इसी बीच शनिवार को भोपाल में एक टी आई(TI), 2 जूनियर डॉक्टर(Junior doctor) सहित से 39 लोगों की रिपोर्ट(report) कोरोना पॉजिटिव(corona positive) आई थी। जिसके साथ ही प्रदेश में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 743 पहुंच गई है। वहीं अब तक 31 लोग कोरोना महामारी(pandemic) से मौत की चपेट में आ चुके हैं। बता दे कि पॉजिटिव मिले मरीजों में 15 मामले जहांगीराबाद और 10 मामले मंगलवारा से हैं। वहीँ शनिवार को राजधानी में 1247 एंपलों की जांच की गई।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews