फिलहाल नहीं दिख रहे लॉकडाउन खत्म होने के आसार, PM से वीसी में सभी मुख्यमंत्री सहमत

फिलहाल नहीं दिख रहे लॉकडाउन खत्म होने के आसार, PM से वीसी में सभी मुख्यमंत्री सहमत

भोपाल

प्रधानमंत्री (prime minister) नरेंद्र मोदी (narendra modi) ने सोमवार monday को देशभर के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों (chief ministers) और गृह मंत्रियों (home ministers) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। मोदी ने इस चर्चा के दौरान सभी राज्यों से 15 मई तक कोरोना संक्रमण से निपटने के बारे में उपाय और आगे के लिए सुझाव मांगे हैं जिनके आधार पर कोरोना से निपटने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि सभी राज्यों को मिलकर इस संकट से निपटना है और कोशिश की जाए कि यह संकट गांवों तक ना पहुंचे ।पश्चिम बंगाल (west bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (mamta banerjee) ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री पर पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। वहीं कई राज्यों ने केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने मुंबई की लोकल रेल चलाने की मांग की। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (arvind kejriwal) ने कहा कि क्वारेंटाइन एरिया को छोड़कर दिल्ली (Delhi) के सारे आर्थिक क्षेत्रों को खोल दिया जाना चाहिए। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (amrinder singh) ने कहा कि यह राज्य सरकार को तय करना चाहिए कि कौन से क्षेत्र रेड ग्रीन या ऑरेंज ऑन बनाए जाएं । हालांकि इस मौके पर सभी राज्यों में एकरूपता इस बात को लेकर नजर आई कि लगभग सभी ने लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की मांग की है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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