राज्यपाल के नाम जिला महिला कांग्रेस कमेटी ने दिया ज्ञापन, ये रही मुख्य मांगे

राज्यपाल के नाम जिला महिला कांग्रेस कमेटी ने दिया ज्ञापन, ये रही मुख्य मांगे

खंडवा।सुशील विधानी

आज जिला महिला कांग्रेस कमेटी खंडवा एवं ग्रामीण के जिला अध्यक्ष अर्चना तिवारी के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर महिलाओं ने ज्ञापन दिया। जापान में करुणा महामारी के दौरान उत्पन्न ने स्थानीय समस्याओं और उनके तत्काल निदान हेतु कलेक्टर से चर्चा की। इस दौरान ज्ञापन में जो मुख्य मांगे थे। लॉकडाउन के दौरान घरेलू व्यवसाय के औद्योगिक संस्थाओं के विद्युत बिल माफ किया जाए। वर्तमान रीडिंग के हिसाब से बिजली बिल दिए जाए। सभी निजी संस्थाओं के शैक्षणिक संस्थाओं के शैक्षणिक शुल्क माफ किया जाए ।

गरीबी रेखा से बाहर मध्यमवर्गीय उन निम्न वर्गीय परिवारों को समुचित खाद्यान्न उचित माध्यम से उपलब्ध कराया जाए। राज्य सरकार दैनिक कामगार जैसे के शिल्प बास शिल्प वास्तुशिल्प मूर्तिकार हम माल हाथ ठेला धारी ऑटो चालक फुटकर फल विक्रेता जैसे अन्य दैनिक कामगारों को तत्काल राहत राशि उनके खाते में डाली जाए। जिन किसानों का अनाज पानी लगने से खराबी अंकुरित हो गया है। जिन किसानों के खराब अनाज का पंचनामा तैयार किया गया है। उनके खातों में तत्काल राहत राशि डाली जाए। लॉकडाउन के दौरान नगर निगम के सभी करो को माफ किया जाए। जैसे जलकर संपत्ति कर माफ किया जाए युवा साथियों को स्वरोजगार योजना के अंतर्गत लोन उपलब्ध कराया जाए जहां-जहां गेहूं चने का उत्पादन अधिक हुआ है प्रशासन अनाज को रखने की उचित व्यवस्था करें ऐसे अनेक बिंदुओं को लेकर श्रीमती रचना तिवारी जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में खंडवा कलेक्टर महोदय को ज्ञापन दिया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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