Deepotsav In Ayodhya: 5 लाख 84 हजार दीयों से जगमग राम की नगरी, रोशनी से नहाई पूरी अयोध्या

Deepotsav In Ayodhya: 5 लाख 84 हजार दीयों से जगमग राम की नगरी, रोशनी से नहाई पूरी अयोध्या

अयोध्या, डेस्क रिपोर्ट| इस दिवाली श्रीराम की नगरी अयोध्या (Ayodhya) में दिवाली (Diwali) बेहद ख़ास है| 5 लाख 84 हजार जगमग दीपों से राम की नगरी जगमगा उठी है| राम की नगरी में राम का गुणगान हो रहा है, पूरी अयोध्या में श्रीराम (Shriram) के जयकारे लगाए जा रहे हैं|

अयोध्या में दिवाली भव्य तरीके से मनाई जा रही है| सरयू तट समेत पूरे अयोध्या में ‘दीप’ जलाए गए हैं. इस दौरान वर्चुअल लाइटिंग भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है| सरयू के अलग अलग घाटों पर ही पांच लाख 84 हजार दीप जलाए गए। इसके अलावा भी अयोध्या के अलग अलग हिस्सों में लाखों दीप जले हैं। इस बार की दिवाली खास इसलिए भी है क्योंकि कुछ वक्त पहले ही राम मंदिर की नींव रखी गई थी|

अयोध्या दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम की पैड़ी में आरती की और में ‘दीपोत्सव’ के रूप में राम की पैड़ी में दीप जलाए| हेलिकॉप्टर से राम की पैड़ी के रामकथा पार्क में भगवान श्रीराम, सीताजी तथा लक्ष्मण के स्वरूप के उतरने पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ तथा उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने स्वागत किया। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामारी के दौरान भी श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव कर दिया है। अयोध्या के सपने को पूरा करने के लिए हम उनके आभारी हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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