इंदौर और झाबुआ के पलायन लोगों की घर वापसी शुरू

इंदौर और झाबुआ के पलायन लोगों की घर वापसी शुरू

सीहोर।अनुराग शर्मा

सीहोर में फंसे मजदूर को इंदौर और झाबुआ के लिए प्रशासन ने बस से रवाना किया। शाम को दूसरी बस से राजस्थान के लिए मजदूरों को करेंगे। रवाना मजदूरों को जाने से पहले बस का किया सैनिटाइजर(sanitizer) सभी मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। जिला प्रशासन द्वारा सभी मजदूरों को भोजन कराया गया एवं खाने के पैकेट भी दिए गये सीहोर कलेक्टर(collector) अजय गुप्ता विधायक(MLA) सुदेश राय द्वारा हरी झंडी दिखाकर एक दर्जन से अधिक मजदूरों को प्रशासन ने झाबुआ रवाना किया।

लॉकडाउन(lockdown) की सबसे ज्यादा मार मजदूरों पर पड़ी है। लॉकडाउन में कामकाज ठप होने. के बाद मजदूर अपने घर जाने को मजबूर हैं। लंबे समय से सीहोर(sehore) पहुंचे करीब एक दर्जन से अधिक मजदूरों को प्रशासन ने शहर के बस स्टैंड(bus stand) से बस से रवाना किया। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार इन मजदूरों का मेडिकल चेकअप आदि कर रवाना किया। जाते समय मजदूरों के चेहर खिल गए। क्योंकि लंबे समय से भूख और महामारी की खबरों के कारण उनको घर जाने का बेसब्री से इंतजार था और उनकी इच्छा प्रशासन ने सोमवार को पूरी की।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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