जब कुम्हार के घर पहुंचे CM शिवराज ने आजमाया चाक पर हाथ, लोगों से की यह अपील

जब कुम्हार के घर पहुंचे CM शिवराज ने आजमाया चाक पर हाथ, लोगों से की यह अपील

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के वोकल फॉर लोकल (vocal for local) मंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj SIngh Chauhan) ने भी छोटे छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने दिवाली पर मिटटी के दीये खरीदने की अपील की है| वहीं सीएम शिवराज (CM Shivraj) ने कुम्‍हार के चाक पर हाथ भी आजमाया और मिटटी के दीये और खिलोने बनाने की कोशिश की|

सोमवार को श्योपुर (Sheopur) के बरगवां पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज ने एक कुम्हार को मिटटी के वर्तन बनाते देखा तो चाक पर अपना हाथ आजमाने से खुद को न रोक सके। इस दौरान उन्होंने कल्याण प्रजापति के घर पहुँचकर मिट्टी के खिलौने व दीपक बनाने वाला चाक चलाया| कुम्हार से मिट्टी के बर्तन निर्माण की विधि जानी और बर्तनों की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी ली|

मिटटी के दीये खरीदने की अपील
सीएम शिवराज ने ट्वीट कर दिवाली पर मिटटी के दीये खरीदने की अपील की है| उन्होंने लिखा- मित्रों, इस दीपावली पर हमारे बहुत से छोटे-छोटे व्यापारी भाइयों को आर्थिक रूप से सशक्त करने में योगदान देने का एक स्वर्णिम अवसर हमारे पास है। मिट्टी से बने दीपक अधिक से अधिक संख्या में खरीदें। इसके साथ ही जितने भी स्थानीय उत्पाद हों,उन्हें प्राथमिकता दें।

https://twitter.com/CMMadhyaPradesh/status/1325788812912549889

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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