सियासी बवाल के बाद कमलनाथ का बड़ा बयान, ‘हां मैंने आइटम कहा, मैं भी आइटम हूं’

kamalnath-congress

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) के महिला मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) को लेकर दिए बयान पर बवाल के बाद कमलनाथ का बयान सामने आया है| उन्होंने कहा कि हां मैंने आइटम (Item) कहा है क्योंकि यह कोई असम्मानजनक शब्द नहीं है। मैं भी आइटम हूं आप भी आइटम है और इस अर्थ में हम सभी आइटम है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में कार्यसूची को आइटम नंबर लिखा जाता है, पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में भी आइटम नंबर लिखा जाता है। क्या यह असम्मानजनक है?

पूर्व सीएम कमलनाथ ने जारी बयान में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) पर हमला बोला| उन्होंने कहा कि शिवराज जी अभी चुनाव में 15 दिन बचे और आप इतने हताश हो गए हैं कि आप शब्दों के अर्थ बदल कर चुनाव जीतना चाहते हैं। कमलनाथ ने कहा कि जनता आपसे पूछ रही है कि आपने 2018 के दृष्टि पत्र में 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था तो आपने इन 7 महीनों में कितनी नौकरियां दीं। उत्तर देने की बजाय आप कह रहे हैं कमलनाथ ने आइटम कहा ।

कमलनाथ ने कहा मध्य प्रदेश की जनता जब खून के घूंट पी रही है तो उसके आंसू पौंछने की बजाय आपकी पार्टी मेरे कोक पीने को मुद्दा बना रही है ।क्या यह कोई मुद्दा है? क्या इससे जनता का जीवन जुड़ा है? शिवराज जी यह तो बताएं कि अगर कमलनाथ कोक पीना बंद कर दें तो क्या प्रदेश में माफिया राज रुक जाएगा? बलात्कार रुक जाएंगे? किसानों की आत्महत्या रुक जाएगी? जहरीली शराब से निर्दोष लोगों की मौतें रुक जाएंगीं? नाथ ने कहा कि सामने आइए और मुकाबला कीजिए। सहानुभूति और दया बटोरने की कोशिश वही लोग करते हैं जिन्होंने जनता को धोखा दिया हो। जिनके पास जनता का सामना करने के लिए कोई सच ना हो।

पूर्व सीएम ने कहा मध्य प्रदेश जानता है कि आज नबालिग बच्चियां भी सुरक्षित नहीं है और आप स्त्री की अस्मिता की बात कर रहे हैं ।क्या आप की सरकार बच्चियों को सुरक्षा की गारंटी दे सकती है? प्रदेश के करोड़ों गरीबों आदिवासियों को जानवरों के खाने योग्य खाद्यान्न देने के बाद, क्या आपको लगता है कि शब्दों के अर्थ का अनर्थ करने से आप चुनाव जीत जाएंगे जनता ठान कर बैठी है गद्दारी के जवाब देने के लिए 10 तारीख तक इंतजार करिए।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews