दिल्ली जाने की अटकलों पर बोले कमलनाथ- मैं कहीं नहीं जा रहा, मध्य प्रदेश में ही रहूंगा

दिल्ली जाने की अटकलों पर बोले कमलनाथ- मैं कहीं नहीं जा रहा, मध्य प्रदेश में ही रहूंगा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेश कमलनाथ (Kamalnath) ने साफ़ कर दिया है कि वे मध्य प्रदेश छोड़कर नहीं जाएंगे| दिल्ली जाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए कमलनाथ ने गुरुवार को भोपाल (Bhopal) में कहा कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूं। अब बाकी जिंदगी यहीं रहूंगा।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारवार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में कमलनाथ ने कहा मुझसे कई लोगों ने पुछा क्या दिल्ली जा रहे हो, मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं कहीं नहीं जा रहा, मैं मध्य प्रदेश में रहूँगा, बाकी जीवन यही गुजरेगा| उन्होंने छिंदवाड़ा में दिए गए आराम करने वाले बयान पर कहा मैं आराम भी नहीं करूंगा। मैंने आराम करने की बात कार्यकर्ताओं के साथ निकाय चुनाव को लेकर संवाद के दौरान उन्हें सक्रिय करने के संदर्भ में कही थी।

कमलनाथ ने कहा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष में पद को लेकर निर्णय पार्टी करेगी। मैंने पहले भी इन पदों के लिए आवेदन नहीं किया था। वहीं संगठन में बदलाव को लेकर कहा कि इसको लेकर पहले चर्चा हुई थी, इसमें भी दो राय है। एक पक्ष की राय है कि निकाय चुनाव से पहले यह कर दिया जाए तो दूसरा पक्ष चुनाव होने तक रुकने के पक्ष में है। आम सहमति बनाकर केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करके अंतिम रूप दिया जाएगा, इस सम्बन्ध में दिल्ली में उनकी चर्चा हुई है और आपस में भी चर्चा की जा रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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