सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां, पुलिस ने ग्रामीणों पर भांजी लाठियां

सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां, पुलिस ने ग्रामीणों पर भांजी लाठियां

राजगढ।

लॉकडाउन में सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब व मजदूर व मध्यम वर्ग हो रहा है । राहत के लिए केंद्र सरकार द्वारा जन धन खाता धारकों को 500 रुपये की राशि खातों में पहुचाई गई है ,जिसको लेने के लिएमध्यप्रदेश के राजगढ़ में बैंको के बाहर जन धन खाता धारकों व पेंशन लेने के लिए बड़ी सँख्या में सुबह 4 बजे से ही ग्रामीणों को भीड़ लगी हुई है ,जिसमे सोशल डिस्टेंस का भी उल्लंघन हो रहा है ।बैंक के बाहर लोगो को लाइन में खड़े करने के लिए पुलिस ने ग्रामीणों पर लाठियां तक भांजी

राजगढ़ में शुक्रवार को पुलिस थाने के पास स्थित बैंक ऑफ इंडिया के बाहर जन धन खाते में आये 500 रुपये की राशि लेने के लिए सुबह 4 बजे से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं व पुरुषों की भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई , भीड़ की वजह से बाजार के जाम न लगे ,इसको लेकर पुलिस ने लोगो को शासकीय बालिका विद्यालय में लाईन लगा कर बैठा दिया, ओर देखते ही देखते विद्यालय में बड़ी सख्या में महिला व पुरुषों की लम्बी कतार लग गई ,जिसकी चलते सोशल डिस्टेंस का भी उल्लंघन होता रहा, सुबह 4 बजे से आये लोगो को बैंक ने जब सुबह 11 बजे तक टोकन नही दिया तो ..कुछ ग्रामीण व महिलाएं बैंक के सामने जाकर विरोध करने लगे ,इसके बाद मौके पर राजगढ़ कोतवाली से पुलिस को मौके पर आकर लोगो को लाइन में खड़ा करने के लिए ग्रामीणों पर लाठियां भांजनी पड़ी ।।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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