चाकूओं से गोदकर युवक की हत्या, झाड़ियो में मिला शव

चाकूओं से गोदकर युवक की हत्या, झाड़ियो में मिला शव

जबलपुर, संदीप कुमार| जबलपुर (Jabalpur) के मटामर गाँव मे रहने वाले 35 साल के एक युवक की चाकूओं से गोदकर हत्या (Murder) कर दी गई| मृतक रेल्वे स्टेशन के बाहर होटल चलाता था, जिसका नाम मनबहोर तिवारी बताया जा रहा है| मूलतः रीवा (Rewa) का रहने वाला मृतक कुछ माह पहले ही जबलपुर आया था और अपने ससुराल में रहकर केंटीन में काम किया करता था।

कैलाशधाम के पास मिला घायल हालत में-अस्पताल पहुँचते ही हुई मौत
बताया जा रहा है कि देर रात मृतक मनबहोर तिवारी अपनी बाइक से जब घर आ रहा था, जैसे ही वह कैलाशधाम पहुँचता है अचानक उसकी चीख पुकार मच जाती है,आनन फानन में स्थानीय लोग उसे घायल हालत में ईलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर जाते है जहाँ उसकी मौत हो जाती है।

हमला करने वाला कौन-पुलिस के लिए अबूझ पहेली
होटल व्यवसाई पर हमला करने वाला कौन है इसके विषय में खमरिया पुलिस पतासाजी में जुटी हुई है वहीं जांच में यह भी जानकारी लगी है कि मनबहोर को उसके घर से लगभग 2 किलोमीटर दूर हमला किया गया था, मौके पर मृतक के चप्पल और शरीर में कई घाव भी मिले हैं। पुलिस के मुताबिक मृतक को कैलाश धाम में रहने वाले आकाश और विकास अपनी बाइक से अस्पताल लेकर गए थे।

होटल कर्मचारियों से की जा रही है पूछताछ
मृतक मनबहोर तिवारी की हत्या के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर होटल के कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है, पुलिस यह भी जानकारी जुटा रही है कि उसका किसी से विवाद तो नहीं हुआ था, वही मोबाइल के नंबरों के आधार पर भी जांच की जा रही है कि 1 सप्ताह में मन बहुत के पास कितने फोन आए थे और उसने कितने लोगों से बात की थी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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