Fraud: न अनुभव, न पात्रता- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने महिला पॉलिटेक्निक के Principal

Fraud: न अनुभव, न पात्रता- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने महिला पॉलिटेक्निक के Principal

सीहोर।अनुराग शर्मा

महिला पॉलिटेक्निक के प्रचार्य पड़ पर आसीन पंकज जैन का विवादों से पुराना नाता रहा है। कालेज की केटरिंग से लेकर विरिष्ठ महिला व्यख्याता सीमा कीर का ट्रांसफर होने के बाद भी रिलीव न करना कालेज में अन्य आधायपको के बीच गुटबाजी पंकज जैन की आदतों में शामिल है। विभागीय जांच के दास्तावेजो से जाहिर होता है कि पंकज जैन को आध्यपन का अनुभव न होना प्राचार्य पद के लिए पात्र न होने के बावजूद पंकज जैन शासकीय नियमो की कमी का लाभ उठाकर प्राचार्य पद पर आसीन हो गए।

विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार पंकज जैन के प्रकरण में प्राथमिक तोर पर पद की अहर्ता पूर्ण न किये जाने एवं आपराधिक कृत्य करते हुवे भारतीय दंड संहिता की धारा 420 एवं 463 के तहत कूटरचित दास्तावेजो को छल करने के लिए इस्तेमाल कर भृम की स्थिति निर्मित की उक्त आशय का पत्र पूर्व प्रचार्य द्वारा संचालक तकनीकी शिक्षा संचनलाय सतपुड़ा भवन को दिनाक 29 जनवरी 20 को लिखा गया है। एक अन्य पत्र 24 जनवरी 20 के है जिसे विधायसगर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ने प्रचार्य शासकीय महिला पॉलिटेक्निक महाविधायल को लिखा है। जिससे स्पस्ट है कि जिन कोर्स के माध्यम से पंकज जैन प्रचार्य पद पर आसीन हुवे है। उन कोर्स को उक्त इंस्टीट्यूट वर्ष 1997 से 2004 की अवधि में संचालित ही नही थे।

एक अन्य मामला महिला अध्यापक सीमा कीर का है जिसका ट्रांसफर फरवरी माह में पन्ना हो गया था और उनको रिलीव करने का आदेश संचालक ने अपने आदेश में था। पर पंकज जैन ने रिलीव आदेश की कॉपी को ठंडे बस्ते में डाल दिया। न जाने क्या वजह है कि जब संचालक मोहदय सीमा कीर के रिलीव का आदेश दे चुका है। तो ऐसे में क्यो उन्हें रिलीव नही किया जा रहा है।पोलेटेकनीख परिचार्य पंकज जैन का कहना है शासन जांच कर रहा है शासन जो निर्णय लेगा वह मंजूर है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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