राशन को तरसी महिलाओं ने तोड़ा लॉक डाउन, पूर्व मंत्री के बंगले पहुंची

राशन को तरसी महिलाओं ने तोड़ा लॉक डाउन, पूर्व मंत्री के बंगले पहुंची

भोपाल।
पूर्व मंत्री और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा सत्ता से हटने के बाद भी जनता के प्रति अपने फर्ज को नही भूल रहे है। रोजाना मजदूर और बेसहारा लोगों आटा एवं आलू के पैकेट बांट रहे है।विधायक की इस पहल पर सैकड़ों लोग लॉक डाउन का उल्लघंन कर उनके बंगले पर पहुंच रहे है।आज रविवार को भी सैकड़ों महिलाएं राशन-पानी की आस में वहां पहुंची, हालांकि बंगले पर पुलिस द्वारा सोशल डिस्टेसिंग का पूरा ध्यान रखा गया लेकिन कही कही झुंड बनाकर खड़ी होती भी महिलाएं दिखाई दी।

महिलाओं का कहना है कि बीमारी के चलते काम-काज ठप्प पड़ गया है, खाने के लाले पड़ रहे है , बच्चों को भूखा तो नही सुला सकते है।जबतक बीमारी नही जाती खाने पीन के तो व्यवस्था करनी है होगी, इसलिए यहां पहुंचते है।

दरअसल, दो दिन पहले पीसी शर्मा ने ट्वीट कर कहा था कि कोरोना वाइरस से फैल रही महामारी एवं 21 दिन के लॉक डाउन के समय में मेरी दक्षिण-पश्चिम विधानसभा भोपाल क्षेत्र में कोई भी गरीब , मजदूर , दिव्यांग , बुजुर्ग व बेसहारा व्यक्ति भूखा न रहे। इसके लिए उन्होंने टोल फ्री नंबर 8982464232 , 9977210011 भी जारी किया था और कहा था कि हमारी विधानसभा के समस्त पूर्व पार्षदगणों को फोन लगायें , हम आपकी हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध हैंइन नंबरों पर फोन लगाकर हमें अपनी समस्याओं से अवगत करायें।दिन हो या रात पीसी शर्मा 24X7 आपके साथ ।इसी के चलते रोज मजदूर और गरीब तबका उनके घर पहुंच रहे है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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