कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने किया गिरफ्तार, CM के कार्यक्रम में डाल सकते थे बाधा, धरने की है घोषणा

कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने किया गिरफ्तार, CM के कार्यक्रम में डाल सकते थे बाधा, धरने की है घोषणा

ग्वालियर, अतुल सक्सेना

भारतीय जनता पार्टी के तीन दिवसीय सदस्यता ग्रहण समारोह से पूर्व पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को उनके घर से उठा लिया। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस नेता कार्यक्रम में बाधा डाल सकते हैं उधर कांग्रेस के फूलबाग में धरने की घोषणा के चलते पुलिस ने धन स्थल से पहले ही फूलबाग गुरुद्वारे पर बैरिकेट लगाकर कांग्रेस को रोक दिया है।

भाजपा का तीन दिवसीय सदस्यता ग्रहण समारोह आज से शुरू होना है। इसमें सिंधिया समर्थकों के अलावा बहुत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भाजपा में शामिल होने की संभावना है। उधर सिंधिया से नाराजी के चलते कांग्रेस के कई नेता मुख्यमंत्री और सिंधिया के सामने काले झंडे दिखाकर या अन्य तरह से प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे थे जिसकी भनक पुलिस को लग गई और पुलिस ने उन्हें सुबह सुबह घर से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने युवक कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आर्यन शर्मा और NSUI के प्रदेश महासचिव सचिन द्विवेदी को विंडसर हिल्स स्थित उनके घर से उठा लिया और विश्व विद्यालय थाने में बंद कर दिया । उधर कांग्रेस भाजपा के इस सदस्यता अभियान का विरोध कर रही है कांग्रेस का कहना है कि कोरोना काल चल रहा है ऐसे में भाजपा का सदस्यता अभियान लोगों की जान को खतरे में डाल सकता है। विरोध के चलते तीन दिनों तक कांग्रेस ने धरना देने की घोषणा की है। आज पहले दिन सुबह गांधी प्रतिमा के नीचे फूलबाग पार्क में धरना देने की कांग्रेस ने घोषणा की है लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को रास्ते में बैरिकेट लगाकर रोक लिया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं की हल्की झड़प भी हुई। जिसके बाद पुलिस ने धरना स्थल पर बढ़ रहे बहुत से कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हालांकि कांग्रेस का कहना है कि सरकार और पुलिस हमसे क्यों डर रही है। कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि ग्वालियर चंबल संभाग के हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को घर से उठाकर थाने में बैठाने की खबर है। शिवराज जी मध्यप्रदेश में घोषित आपात काल लगाया है या अब जयचंदी इतनी अधिक सवार हो गई कि जनता से डर लग रहा है..

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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